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पवित्र नंदा राजजात यात्रा की गौरवशाली परंपरा_ 500 निशानों के साथ शामिल होगा मां नयना देवी मंदिर का ध्वज

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स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- ऊत्तराखण्ड की पवित्र नंदा राजजात यात्रा से जुड़े भुवन नौटियाल ने अगले वर्ष होने वाली यात्रा के संबंध में नैनीताल की धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से आयोजन की तैयारियों पर चर्चा की। माँ नयनादेवी मंदिर का ध्वज सदियों सेवा यात्रा में होता है शामिल।

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नैनिताल क्लब में आज हिमालयी सचल महाकुंभ की सर्वोच्च केंद्रीय आयोजन समिति श्री नंदादेवी राजजात समिति के महामंत्री भुवन नौटियाल ने प्रमुख धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के सदस्यों से मुलाकात की। उन्होंने, श्री नंदादेवी राजजात यात्रा 2027 के आयोजन की स्थानीय तैयारियों के संबंध में चर्चा वार्ता की।

अत्यंत धार्मिक महत्व की इस यात्रा के आयोजन को सफल बनाने को लेकर नैनीताल के विभिन्न संबंधित पक्षों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, महिला दलों के साथ लगातार बैठकें संपन्न हुई। बैठकों में आगामी यात्रा के लिए व्यापक कार्ययोजना पर अभी से कार्य प्रारंभ करने पर एकमत होकर निर्णय लिया गया।

दुनिया की सबसे लंबी और दुर्गम क्षेत्रों में आयोजित होने वाली इस 280 किलोमीटर की धार्मिक पदयात्रा के लिए लोगों में गजब का उत्साह और श्रद्धाभाव देखा गया। भुवन नौटियाल का श्री राम सेवक सभा मल्लीताल, मां नयना देवी मंदिर समिति, विभिन्न सामाजिक संगठनों, विधायक सरिता आर्या और दर्जा राज्यमंत्री भावना मेहरा द्वारा स्वागत किया गया।


भुवन नौटियाल ने अपने संबोधन में कहा की गढ़वाल के राजा ने आठवीं सदी से श्री नंदा देवी मंदिर नौटी से प्रत्येक 12 वर्ष के बाद श्री नंदा देवी राजजात यात्रा का शुभारंभ किया। इसका संचालन गढ़वाल के राजवंशी कांसुवा गांव के राजकुमार गढ़वाल राजवंश के प्रतिनिधि के रूप में आज भी श्रद्धापूर्वक किया जाता है।

गढ़वाल राज्य की प्रथम राजधानी चांदपुरगढ़ी में गढ़वाल का राजवंश यात्रा में श्री नंदा देवी की पूजा अर्चना विधिवत रूप से होती है। कुमाऊं राजवंश अल्मोड़ा की नंदा तथा कुमाऊं क्षेत्र की देव डोलियों के साथ नंद केसरी में पूजा अर्चना के लिए यात्रा में शामिल होते हैं।

पूरे गढ़वाल और कुमाऊं से 500 से अधिक देव डोलिया, छतोलिया, ध्वज एवं निशान आदि इस यात्रा में शामिल होते हैं। दुनिया की यह अकेली धार्मिक यात्रा है जिसमें माँ भगवती नंदा को मायके से ससुराल कैलाश भेजने के लिए 12 वर्षों के बाद पूरे उत्तराखंड के स्थानीय देवी देवता शामिल होते हैं।

नौटियाल ने बताया कि नैनीताल से मां नयना देवी मंदिर का ध्वज यात्रा में अल्मोड़ा होकर शामिल होने की गौरवशाली परंपरा रही है। उन्होंने श्री राम सेवक सभा मल्लीताल एवं मां नयना देवी मंदिर समिति के सदस्यों से आग्रह किया है कि वह संबंधित पक्षों से मिलकर यात्रा के पड़ाव व यात्रा मार्ग में ढांचागत सुविधाओं और साथ ही साथ धार्मिक अनुष्ठान की व्यापक योजना बनाएं।


विधायक सरिता आर्या ने कहा कि वह आयुक्त और जिलाधिकारी नैनीताल से इस धार्मिक यात्रा की कार्ययोजना को लेकर वार्ता करेंगी।

विधायक ने बताया कि इस धार्मिक यात्रा के ऐतिहासिक आयोजन हेतु मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य सरकार के अधिकारियों को विस्तृत कार्य योजना बनाने हेतु निर्देशित किया जा चुका है। मुलाकात के दौरान राजीव लोचन साह, जीवंती भट्ट, कविता साह गंगोला, अधिवक्ता हरीश राणा, मंजू रौतेला आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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