अब तो मानोगे कि वो जिंदा नहीं है.. बहन का कंकाल कंधे पर लाद कर बैंक पहुंचा भाई

ख़बर शेयर करें

सिस्टम ने बेबस किया- बहन का ‘कंकाल’ कंधे पर लाद ब्रांच पहुंचा भाई, कहा, ‘अब दो पैसे’

52 साल के एक भाई अपनी बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंच गए. उन्होंने बताया कि बहन की मौत के बाद जब वो पैसा निकालने बैंक पहुंचे तो उनसे डेथ सर्टिफिकेट मांगा गया. उनके पास दस्तावेज़ नहीं थे, जिसके बाद उन्होंने ये कदम उठाया।

ओडिशा में केन्दुझर जिले के पटना इलाके से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां दियानाली गांव के रहने वाले जीतू मुंडा ने वो किया, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. 27 अप्रैल को वो अपनी बहन के कंकाल को कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गए. आजतक से जुड़े अजय कुमार नाथ की रिपोर्ट के मुताबिक, जीतू मुंडा की बड़ी बहन कालरा मुंडा की करीब दो महीने पहले बीमारी की वजह से मौत हो गई थी।

जीतू की उम्र 50 साल है. रिपोर्ट के मुताबिक, जीतू ने अपनी बहन की मौत से पहले उनके अकाउंट में लगभग 19 हजार रुपये जमा करवाए थे. ये रकम उन्होंने अपने मवेशी बेचकर जुटाई थी और उनका अकाउंट ओडिशा ग्रामीण बैंक की एक लोकल ब्रांच में था. बहन के जाने के बाद जीतू उन पैसों को निकालना चाहते थे. कोई और कानूनी वारिस न होने की वजह से वो पैसा निकालने के लिए कुछ दिन पहले बैंक गए, लेकिन उनसे जरूरी दस्तावेज लाने को कहा गया।

जैसे कि डेथ सर्टिफिकेट, नॉमिनी की जानकारी और बाकी कागज़.
लेकिन वो कागज़ नहीं जुटा पाए. तंग आकर वो अपनी बहन की कब्र पर गए. वहां से उनका कंकाल निकाला और कंधे पर रखकर करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर बैंक पहुंच गए. ताकि साबित कर सकें कि बहन अब जिंदा नहीं है. बैंक के बाहर उन्होंने कंकाल रख दिया और वहीं धरने पर बैठ गए।

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, जीतू मुंडा ने बताया, 

“मैं कई बार बैंक गया. वहां के लोग कहते थे कि जिस व्यक्ति के नाम पर पैसा है, उसे साथ लेकर आओ. मैंने कहा कि वो मर चुकी है, लेकिन उन्होंने मेरी बात नहीं मानी. इसलिए मजबूरी में मैंने कब्र खोदी और उसकी कंकाल लेकर बैंक पहुंचा, ताकि साबित कर सकूं कि वह अब नहीं रही.”

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची. पटना थाना के प्रभारी किरण प्रसाद साहू ने बताया कि जीतू पढ़े-लिखे नहीं हैं और आदिवासी समुदाय से आते हैं. उन्हें ये नहीं पता कि नॉमिनी या कानूनी वारिस क्या होता है. बैंक अधिकारियों ने भी उन्हें सही तरीके से प्रक्रिया समझाने की कोशिश नहीं की, जिसकी वजह से ऐसा हुआ।

वहीं, ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO), मानस दंडपाट ने आश्वस्त किया कि वो उनकी समस्या का समाधान निकालेंगे. डेक्कन हेराल्ड ने बैंक सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में बताया कि खाते का जो असल नॉमिनी था, उसकी भी पहले ही मौत हो चुकी थी. ऐसे में जीतू मुंडा ही एकमात्र हकदार बचे थे. पुलिस की मौजूदगी में कंकाल को दोबारा कब्र में दफनाया गया।

बैंक ने फिर क्या किया?

इंडिया टुडे से बात करते हुए इलाके के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) ने बताया कि जीतू मुंडा को रेड क्रॉस फंड से तत्काल राहत के तौर पर 20,000 रुपये दिए गए हैं. इसके अलावा बैंक ने उनकी जमा राशि 19,204 रुपये भी उन्हें जारी कर दी है।

Ad
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 Join our WhatsApp Group

👉 Subscribe our YouTube Channel

👉 Like our Facebook Page

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *