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जेनी प्रकरण_ चुनावी आहट के बीच 23 साल पुराना मामला गरमाया

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अंकिता प्रकरण से ध्यान भटकाने की सियासत या पुराने आरोपों की नए सिरे से जांच ? हरक सिंह ने बीजेपी पर लगाए राजनीतिक इस्तेमाल के आरोप, कहा- तत्कालीन बीजेपी सरकार के दौरान CBI जांच में मिल चुकी है क्लीन चिट।

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देहरादून। उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले 23 साल पुराना जेनी प्रकरण एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने अपने ऊपर लगे आरोपों को बीजेपी की राजनीतिक साजिश करार देते हुए सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2003 के इस मामले में तत्कालीन केंद्र की बीजेपी सरकार के दौरान सीबीआई जांच हुई थी और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। ऐसे में 23 साल बाद इस प्रकरण को फिर उछालने के पीछे राजनीतिक मंशा क्या है?

हरक सिंह रावत का आरोप है कि बीजेपी अंकिता भंडारी प्रकरण से जनता का ध्यान हटाने के लिए पुराने मामले को राजनीतिक हथियार बना रही है। उन्होंने कहा कि जिस समय जेनी प्रकरण की जांच हुई थी, उस वक्त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार थी। ऐसे में अब उसी जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना भी कई सवाल खड़े करता है।

हरक सिंह रावत ने कहा कि इस मामले में सीबीआई ने विस्तृत जांच की थी। उनके मुताबिक, जांच के दौरान विजया बर्थवाल और एक अन्य व्यक्ति का नाम सामने आया था। सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को भी अदालत ने स्वीकार किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय की मेडिकल रिपोर्ट और मामले से जुड़े अन्य दस्तावेज आज भी उपलब्ध हैं।

पूर्व मंत्री ने तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी का जिक्र करते हुए बताया कि जांच के दौरान उन्हें तिवारी का फोन आया था। तिवारी ने उन्हें बधाई देते हुए बताया था कि सीबीआई से उन्हें क्लीन चिट मिल गई है। हरक के मुताबिक, तिवारी ने यह भी बताया था कि उन्हें इसकी जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिली थी।

जेनी की ओर से लगाए गए आरोपों पर हरक सिंह रावत ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उन्होंने जेनी को कभी देखा तक नहीं था। उनके कार्यालय में एक व्यक्ति आया था, जिसने एक लड़की की नौकरी लगवाने की बात कही थी। हरक के अनुसार, उन्होंने मधुबन होटल में नौकरी दिलाने का सुझाव दिया था, लेकिन प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। बाद में लड़की की नौकरी नारी निकेतन में लगवाई गई।

उन्होंने यह भी कहा कि लड़की दो दिन उनके घर पर रही थी, लेकिन उस दौरान भी उन्होंने उसे नहीं देखा।

हरक ने दावा किया कि सीबीआई से क्लीन चिट मिलने के बाद उन्होंने विजया बर्थवाल और आशा नौटियाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा भी दर्ज कराया था। हालांकि, बाद में समझौते और माफी के आग्रह पर उन्होंने मुकदमा वापस ले लिया था।

अंकिता भंडारी प्रकरण से ध्यान भटकाने की साजिश का आरोप

हरक सिंह रावत ने पूरे घटनाक्रम को मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़ते हुए कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली और उत्तराखंड में न्याय यात्रा सहित पार्टी के कार्यक्रमों से बीजेपी परेशान है।

उनका आरोप है कि अंकिता भंडारी प्रकरण में उठ रहे सवालों से जनता का ध्यान हटाने के लिए 23 साल पुराने जेनी प्रकरण को दोबारा राजनीतिक चर्चा में लाया जा रहा है।

गौरतलब है कि 24 अक्टूबर को हल्द्वानी में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर कांग्रेस की यात्राओं पर प्रतिक्रिया देते हुए जेनी प्रकरण का जिक्र किया था। इसके बाद हरक सिंह रावत और बीजेपी नेताओं के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के बयान के बाद भी हरक ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अब जेनी की शिकायत पर पुलिस जांच, डोईवाला सीओ को जिम्मेदारी

इधर, जेनी ने शनिवार को देहरादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वर्ष 2003 में उनके साथ दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया और डीजीपी दीपम सेठ को शिकायत सौंपकर दोबारा जांच की मांग की। उन्होंने अपने 23 वर्षीय बेटे की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट कराने की मांग भी उठाई है।

जेनी का आरोप है कि उस समय उनके साथ हुई घटनाओं और सीबीआई जांच की प्रक्रिया में कई सवाल अनुत्तरित रह गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके बेटे के डीएनए सैंपल नहीं लिए गए थे।

पुलिस मुख्यालय से शिकायत देहरादून पुलिस को भेजी गई है। एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने मामले की जांच के लिए डोईवाला क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा को जिम्मेदारी सौंपी है। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में एक तरफ जेनी पुराने आरोपों की निष्पक्ष जांच और बेटे की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट की मांग कर रही हैं, तो दूसरी तरफ हरक सिंह रावत इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए पुरानी सीबीआई जांच और अदालत की प्रक्रिया का हवाला दे रहे हैं। अब आगे देखना ये है पुलिस जांच में क्या निकलता है वहीं चुनाव से ऐन पहले जेनी प्रकरण पर उठा शोर क्या गुल खिलता है।

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