नैनीझील की सेहत संभालेंगी गोल्डन महाशीर, सिल्वर कार्प और लिब्यु बोनियस_ बीज डाले गए

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उत्तराखण्ड की विश्वविख्यात नैनीझील का पारिस्थितिकी तंत्र सुधारने के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय के मत्स्य विभाग ने अलग अलग मछलियों के 21,000 बीज डाले। साइंटिस्टों ने कहा कि झील का पानी मछलियों के लिए मुफीद है। यहां, गोल्डन महाशीर, सिल्वर कार्प के अलावा विशेष रूप से स्थानीय लिब्यु बोनियस को भी प्रवाहित किया गया है।


नैनीझील में आज गोविंद बल्लभ पंत मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय की तरफ से मत्स्य विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ.आशुतोष मिश्रा, जिला विकास प्राधिकरण ए.ई.अभिषेक कुमार, जे.ई. आशुतोष कुरियाल, जे.ई.शिवानी पाल और एरिएशन प्रोजेक्ट से जुड़े आनन्द कोरंगा पहुंचे। फांसी गधेरे के समीप झील में पहुंचे इन लोगों ने झील की गुणवत्ता चैक की।

बताया कि आज तलहटी में 3 एम.जी.ऑक्सीजन है, जबकी सरफेस(सतह)में 5 एम.जी.ऑक्सीजन पाई गई है। इससे पहले भी झील में गोल्डन महाशीर के 4,000, चौगनिया और काल रोहू के 1000 और सिल्वर कार्प के 15,000 बीज डाले थे। विभाग, इससे पहले गंबूचिया, पुण्टिस और बिग हैड मछलियों को झील से निकाला था।

एक्सपर्ट्स ने बताया कि झील की गुणवत्ता पीने लायक न हो लेकिन फिशरीज के नजरिये से ठीक है। एल्गी की मात्रा भी पहले से बेहतर हो गई है।


पंतनगर यूनिवर्सिटी के मत्स्य पालन विभाग के प्रो.डॉ.आशुतोष मिश्रा ने बताया कि आज उन्होंने गोल्डन महाशीर, सिल्वर कार्प और स्थानीय लिब्यु बोनियस मछली के बीज डाले।ईको फ्रेंडली नेचर की 15,000(पंद्रह हजार) सिल्वर कार्प, 5000(पांच हजार)गोल्डन महाशीर और 1000(एक हजार)लिब्यु बोनियस मछली के बीज डाले हैं। ये मछलियां जलीय वातावरण संतुलित करने में सहयोग करती हैं।

बताया कि इससे पहले डाली गई मछलियां अच्छी तरह से बढ़ रही हैं। वो प्रतिवर्ष 400-500ग्राम बढ़ रही है। उन्होंने ये भी कहा कि महाशीर का पनपना जलीय वातावरण का शुद्ध होना दर्शाता है।


जिला विकास प्राधिकरण के सचिव मनीष सिंह ने कहा कि झील कुमाऊं की लाइफलाइन है। जिला प्रशासन, जिला विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित विभाग झील संरक्षण में काम कर रहे हैं। कहा कि ऊत्तराखण्ड की राज्य मछली महाशीर को भी झील में प्रवाहित किया गया है। उन्हें जानकारी मिली है कि महाशीर का झील में पनपना झील के स्वस्थ होने का प्रमाण है।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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