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इस दिवाली शुद्धता भी, स्वरोजगार भी…नगर निगम की पहल ने हुनर को दिया बाजार

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हल्द्वानी। त्योहार सिर्फ खुशियां बांटने का नहीं, बल्कि समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने का भी अवसर हैं। इसी सोच के साथ नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम ने इस दीपावली एक सराहनीय पहल की है। निगम ने स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनके हाथों से तैयार कराए गए शुद्ध और स्वच्छ खिले बतासों की बिक्री के लिए शहर में विशेष स्टॉल लगाए हैं।

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दरअसल, पिछले साल त्योहारों के दौरान बाजार में बिकने वाले खिले बतासों की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए नगर निगम ने इस बार शुद्धता के साथ रोजगार को भी अपनी पहल का हिस्सा बनाया। महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर स्वच्छ तरीके से बतासे तैयार करवाए गए, ताकि लोगों को गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री मिले और स्थानीय महिलाओं को अपनी मेहनत से कमाई करने का अवसर भी मिल सके।

नगर निगम की इस पहल को उस समय और प्रोत्साहन मिला, जब पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, सांसद एवं पूर्व रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट और दर्जा राज्यमंत्री सुरेश भट्ट स्वयं स्टॉल पर पहुंचे। तीनों जनप्रतिनिधियों ने अपने परिवार के लिए यहां से खिले बतासे खरीदे और महिलाओं के इस प्रयास को प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर महापौर गजराज सिंह बिष्ट ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल त्योहारों पर शुद्ध खाद्य सामग्री उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है। स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर तैयार करवाए गए खिले बतासे इसी सोच का परिणाम हैं।

महापौर ने शहरवासियों से अपील की कि वे नगर निगम के विशेष स्टॉलों से खरीदारी कर स्थानीय महिलाओं की मेहनत और हुनर को सम्मान दें। उन्होंने कहा कि जब हम स्थानीय उत्पाद खरीदते हैं, तो उसका सीधा लाभ हमारे अपने समाज और परिवारों तक पहुंचता है।

इस मौके पर मंडल अध्यक्ष नीरज बिष्ट, राज्य मंत्री शंकर कोरंगा, ध्रुव रौतेला, मोहन पाठक, पार्षद धीरज पाण्डेय सहित कई गणमान्य लोगों ने निगम के स्टॉल से खरीदारी की।

यह पहल सिर्फ बतासों की बिक्री नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण, स्थानीय रोजगार और स्वच्छता को एक साथ आगे बढ़ाने की मिसाल है। जिससे दीपोत्सव के महापर्व पर कितने परिवारों के घर रोशन हुए और खुशियां बाटीं ये समाज की आर्थिक मजबूती की शुरुआत ऐसे ही छोटे लेकिन सार्थक प्रयासों से होती है।

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