नतीजे के 10 दिन बाद केरल के नए सीएम के नाम का ऐलान_ बैकग्राउंड दिलचस्प है..


केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम का एलान हो गया है। कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने गुरुवार को बताया कि वीडी सतीशन को विधायक दल का नेता चुना गया है। उनके नाम का एलान केरल के चुनाव नतीजों के 10 दिन बाद किया गया है। दरअसल, केरल में इस दौरान मुख्यमंत्री पद को लेकर टकराव जारी था। सीएम पद की रेस में वीडी सतीशन के अलावा केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्नीथाला का नाम था। हालांकि, जमीनी स्तर के नेता रहे वीडी सतीशन अंततः इस रेस में सबसे आगे निकल गए।
क्या है वीडी सतीशन की पारिवारिक और शैक्षिक पृष्ठभूमि?
वीडी. सतीशन जिनका पूरा नाम वदस्सेरी दामोदरन सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को केरल के कोच्चि स्थित नेट्टूर में एक नायर परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम के. दामोदरा मेनन और मां का नाम वी. विलासिनी अम्मा है। दिल्ली के सत्ता हलकों की बजाय उनकी राजनीतिक जड़ें शुरू से ही जमीनी स्तर की राजनीति से जुड़ी रही हैं।
सतीशन की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पनांगड हाईस्कूल से हुई, जो कि क्षेत्र का लोकप्रिय स्कूल है। इसके बाद उन्होंने सैक्रेड हार्ट कॉलेज, थेवारा से स्नातक की पढ़ाई की। सतीशन ने राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज, कोच्चि से मास्टर ऑफ सोशल वर्क की डिग्री हासिल की।
राजनीति में आने से पहले उन्होंने कानून की गहरी पढ़ाई की। उन्होंने केरल लॉ एकेडमी लॉ कॉलेज से एलएलबी की और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज, तिरुवनंतपुरम से मास्टर ऑफ लॉ (एलएलएम) की डिग्री भी हासिल की। वीडी सतीशन को जानने वाले उन्हें एक किताबी कीड़ा (बुकवर्म) नेता मानते हैं, जिनकी अध्ययन में बहुत गहरी रुचि है।
क्या रही राजनीति में आने की कहानी?
1.छात्र जीवन में ही रखा राजनीति में कदम
वीडी सतीशन का राजनीतिक सफर उनकी शिक्षा के दौरान ही शुरू हो गया था। दरअसल, उन्होंने जमीनी स्तर की राजनीति में कदम केरल स्टूडेंट्स यूनियन (केएसयू) के जरिए रखा था। अपने छात्र जीवन में ही वे एक मुखर नेता बन गए और 1986-1987 के दौरान महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष चुने गए। इसके साथ ही, उन्होंने कांग्रेस की छात्र शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के राष्ट्रीय सचिव की जिम्मेदारी भी निभाई।
2.10 साल से ज्यादा हाईकोर्ट में की वकालत
हालांकि, राजनीति में शुरुआत से ही उतरने के बाद भी उन्होंने लंबे समय तक वकालत को अपना पेशा बनाया। वे एक प्रशिक्षित वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। उन्होंने करीब 10 वर्षों तक केरल उच्च न्यायालय में वकालत की। इसी दौरान वे यूथ कांग्रेस में सक्रिय रूप से काम करते रहे और धीरे-धीरे एक तेजतर्रार वक्ता और आक्रामक राजनीतिक आयोजक के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना ली।
3.वकालत के दौरान ही हुई चुनावी राजनीति में एंट्री
चुनावी राजनीति में उनका पहला कदम 1996 में पड़ा, जब उन्होंने परावूर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा।
यह क्षेत्र तब कम्युनिस्ट पार्टी का गढ़ था और उन्हें भाकपा के उम्मीदवार पी. राजू से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बावजूद सतीशन ने हार नहीं मानी और क्षेत्र में सक्रिय रहे। साल 2001 में उन्हें अपनी पहली बड़ी राजनीतिक सफलता मिली, जब वे परवूर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार केरल विधानसभा के लिए विधायक चुने गए।
दिलचस्प बात यह है कि जिस समय वे 2001 में पहली बार विधायक चुने गए, उस समय भी वे केरल उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे थे।



लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
GKM News is a reliable digital medium of latest news updates of Uttarakhand. Contact us to broadcast your thoughts or a news from your area. Email: newsgkm@gmail.com




नतीजे के 10 दिन बाद केरल के नए सीएम के नाम का ऐलान_ बैकग्राउंड दिलचस्प है..
जल जीवन मिशन पर उठे सवाल, करोड़ों खर्च – सड़कें खोदी फिर भी घरों तक नहीं पहुंचा पानी
Nainital : DM और SSP ने खुद दिखाई राह, गाड़ी छोड़ी_ गनर साथ बाइक पर निकले..
UP में कहर, आंधी-तूफान से तबाही_101 लोगों की मौत
Uttarakhand : स्कूल के पीछे गंदा खेल चल रहा था_तीन महिलाओं का रेस्क्यू..