

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में अवैध खनन पर नाराजगी जताते हुए सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिया है कि नदियों से खनन काम मे लगी सभी मशीनों को सीज किया जाए। न्यायालय ने सचिव खनन से ये भी पूछा है कि खनन रॉयल्टी के दामों में भारी अंतर से निजी खनन कर्ताओं को फायदा क्यों पहुंचाया जा रहा है?
उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आर सी खुल्बे की खंडपीठ ने मामले में ये कड़ा आदेश जारी किया है।
खनन संबंधी हलद्वानी निवासी गगन परासर की जनहितयाचिका में आज सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने सरकार से पूछा है कि सरकारी खनन दरों में 31 रुपया प्रति क्विंटल है।
जबकि निजी में 12 से 19 रुपया प्रति क्विंटल है। ये अंतर क्या निजी खनन कारोबारियों को फायदा देने के लिए है ? इसके अलावा न्यायालय ने पूछा है कि नियमानुसार माइनिंग में हाथ से चुगान की अनुमति है, जिसमें सरकार तो हाथ से चुगान ही करा रहा है लेकिन निजी खनन कारोबारी मशीनों से खनन करा रहे हैं, ऐसा क्यों ? खंडपीठ ने सचिव खनन को व्यक्तिगत एफिडेविट जमा कर 21 दिनों में माइनिंग की रॉयल्टी में भारी अंतर को स्पष्ट करने और निजी पट्टा धारकों को क्यों फायदा पहुंचाया जा रहा है इसे स्पष्ठ करने को कहा है।
न्यायालय ने तत्काल प्रभाव से समस्त नदियों और तटों में मशीनों से खनन पर रोक लगा दी है। सभी जिलाधिकारियों को जिला खनन टास्क फोर्स का अध्यक्ष होने के नाते ये आदेश दिए गए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती



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