किले ढह गए_बंगाल-असम में भगवा लहर,तमिलनाडु में ‘थलपति’ का उदय, केरल में कांग्रेस..


देश के पांच बड़े चुनावों ने बदली राजनीति की दिशा
पूरे देश की नजरें पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनाव नतीजों पर टिकी हुई थीं। शुरुआती रुझानों ने ही साफ कर दिया कि 2026 का चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि देश की राजनीति का नया अध्याय लिखने वाला चुनाव साबित हो रहा है।
जहां पश्चिम बंगाल में भाजपा ने ममता बनर्जी के मजबूत किले में सेंध लगाकर सत्ता की ओर ऐतिहासिक बढ़त बनाई, वहीं तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने राजनीतिक भूचाल ला दिया। असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता वापसी की ओर कदम बढ़ाया, जबकि केरल में कांग्रेस गठबंधन की वापसी होती दिख रही है।
बंगाल में भाजपा की ऐतिहासिक बढ़त_ ममता का किला ढहता दिखा
पश्चिम बंगाल में इस बार सबसे बड़ा उलटफेर देखने को मिला। कभी भाजपा के लिए बेहद कठिन माने जाने वाले राज्य में पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 190 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बना ली।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह सिर्फ चुनावी जीत नहीं, बल्कि भाजपा की लंबे समय से चली आ रही रणनीति का परिणाम है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने बंगाल में लगातार कैंप कर माइक्रो मैनेजमेंट के जरिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया।
ममता बनर्जी के सामने सबसे बड़ी चुनौती
Mamata Banerjee लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने का दावा कर रही थीं और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका की तैयारी भी कर रही थीं, लेकिन रुझानों ने उनकी रणनीति को बड़ा झटका दिया।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि सत्ता जाने के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष बढ़ सकता है। अब ममता के सामने पार्टी को एकजुट रखने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।
असम में भाजपा की हैट्रिक_ हिमंता मॉडल पर जनता की मुहर
असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की दिशा में मजबूत बढ़त बना ली है।
Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में भाजपा ने विकास, कानून व्यवस्था और पूर्वोत्तर में मजबूत संगठन के दम पर जीत की हैट्रिक लगाई।
2016 में पहली बार भाजपा ने असम में सत्ता हासिल की थी। इसके बाद 2021 में दोबारा सरकार बनी और अब तीसरी बार जनता ने भाजपा पर भरोसा जताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम का यह परिणाम पूर्वोत्तर में भाजपा की मजबूत पकड़ का संकेत है।
तमिलनाडु में ‘थलपति’ विजय की सुनामी
तमिलनाडु के चुनावों ने पूरे देश को चौंका दिया।
फिल्म सुपरस्टार Vijay की पार्टी TVK पहली बार चुनाव मैदान में उतरी और शुरुआती रुझानों में ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
TVK 100 से ज्यादा सीटों पर बढ़त बनाकर DMK और AIADMK दोनों को कड़ी चुनौती देती दिखी।
स्टालिन को बड़ा झटका
M. K. Stalin की DMK, जो एग्जिट पोल में मजबूत स्थिति में दिखाई जा रही थी, रुझानों में पीछे खिसकती नजर आई।
वहीं भाजपा, जिसने AIADMK के साथ गठबंधन किया था, राज्य में अब भी सीमित प्रभाव में दिखाई दी।
विजय क्यों बने तमिलनाडु की नई उम्मीद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय ने खुद को सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि “युवा और बदलाव” के चेहरे के रूप में पेश किया।
उनकी रैलियों में भारी भीड़, युवाओं के बीच लोकप्रियता और भ्रष्टाचार विरोधी छवि ने TVK को तेजी से मजबूत किया।
विजय के पिता S. A. Chandrasekhar ने दावा किया कि विजय पिछले 30 वर्षों से तमिलनाडु के लिए काम करना चाहते थे और अब जनता उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में देख रही है।
दो सीटों से मैदान में विजय
विजय पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट सीट से चुनाव लड़ रहे हैं और दोनों सीटों पर मजबूत बढ़त बनाए हुए हैं।
पेरम्बूर सीट
DMK का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर विजय ने करीब 29 हजार वोटों की बढ़त बनाकर राजनीतिक समीकरण बदल दिए।
त्रिची ईस्ट सीट
यहां विजय और DMK के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली, लेकिन रुझानों में TVK चीफ बढ़त बनाए हुए हैं।
केरल में कांग्रेस की वापसी
केरल में कांग्रेस गठबंधन ने मजबूत प्रदर्शन किया है।
भाजपा ने सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन शुरुआती रुझानों में पार्टी सीमित सीटों पर ही बढ़त बना सकी।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि केरल में भाजपा अब भी संगठनात्मक विस्तार के संघर्ष से गुजर रही है।
पुडुचेरी में NDA को बढ़त
पुडुचेरी में भाजपा गठबंधन फिर से सत्ता की ओर बढ़ता दिख रहा है।
AINRC और AIADMK के साथ भाजपा गठबंधन ने शुरुआती रुझानों में बढ़त बनाकर सरकार वापसी के संकेत दिए हैं।
क्या कहते हैं ये नतीजे?
भाजपा का विस्तार जारी
बंगाल और असम के नतीजे साफ संकेत देते हैं कि भाजपा अब सिर्फ हिंदी पट्टी की पार्टी नहीं रही।
क्षेत्रीय दलों के सामने नई चुनौती
ममता बनर्जी और स्टालिन जैसे मजबूत क्षेत्रीय नेताओं को इस चुनाव में बड़ा झटका लगा है।
दक्षिण में नया चेहरा बने विजय
तमिलनाडु में विजय का उभार सिर्फ फिल्मी लोकप्रियता नहीं, बल्कि जनता के “नई राजनीति” की तलाश का संकेत माना जा रहा है।
कांग्रेस को मिली राहत
केरल में कांग्रेस की वापसी ने पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर मनोवैज्ञानिक बढ़त दी है।
2026 चुनाव का सबसे बड़ा संदेश
यह चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि राजनीतिक ध्रुवीकरण, नए चेहरों के उभार और क्षेत्रीय राजनीति के पुनर्गठन का चुनाव साबित होता दिख रहा है।
बंगाल में भाजपा का उदय, तमिलनाडु में विजय का विस्फोट और असम में भाजपा की हैट्रिक आने वाले लोकसभा चुनावों की राजनीति पर भी गहरा असर डाल सकती है।



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