हल्द्वानी‘शुद्धिकरण’ विवाद पर हाईकोर्ट में बड़ा अपडेट, 2 FIR..याचिका निस्तारित

ख़बर शेयर करें

नैनीताल/हल्द्वानी

हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ का मामला अब उत्तराखंड हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। मामले में आज हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस घटनाक्रम को लेकर दो FIR दर्ज की गई हैं।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि एक FIR हल्द्वानी में दर्ज हुई है, जबकि दूसरी बेंगलुरु में जीरो FIR के रूप में दर्ज की गई है। यह FIR अखबारों में प्रकाशित खबर के आधार पर दर्ज होने की बात सरकार की ओर से अदालत में कही गई। अब इसे जांच के लिए हल्द्वानी ट्रांसफर किया जाना है।

सुनवाई के दौरान सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि पुलिस मामले की जांच करेगी और घटनाक्रम से जुड़े CCTV फुटेज तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाएगा।

सरकार के आश्वासन के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने याचिका को निस्तारित कर दिया है।

क्या है पूरा विवाद… जानिए

देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ की ओर से इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका में कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद सभा स्थल पर सार्वजनिक रूप से वैदिक मंत्रोच्चार के साथ गंगाजल छिड़ककर कथित ‘शुद्धिकरण’ किया गया।

याचिकाकर्ता ने आशंका जताई कि इस तरह की सार्वजनिक गतिविधि से समाज में वैमनस्यता बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है।

इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक और धार्मिक बयानबाजी भी सामने आई थी। मामला इतना गरमाया कि कांग्रेस की ओर से भी राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की गई थी।

याचिका में आरोप लगाया गया कि हल्द्वानी में ‘शुद्धिकरण’ करने वालों के खिलाफ FIR दर्ज की गई, लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की ओर से दी गई शिकायत पर FIR दर्ज नहीं की गई।

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि पूरे घटनाक्रम से जुड़े वीडियो, CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखा जाए, ताकि बाद में किसी तरह के साक्ष्य से छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे।

इसके साथ ही प्रदेश सरकार को मामले का संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष और प्रभावी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश देने की मांग भी की गई थी।

याचिकाकर्ता के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत भी महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई हैं। उनका कहना है कि दस्तावेजों और उपलब्ध साक्ष्यों के जरिए घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाने का प्रयास किया जा रहा है।

अब हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा दो FIR, जांच और CCTV समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिए जाने के बाद याचिका निस्तारित हो गई है।

Ad Ad Ad Ad
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 Join our WhatsApp Group

👉 Subscribe our YouTube Channel

👉 Like our Facebook Page

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *