बनभूलपुरा में ‘लोन’ के नाम पर बड़ा खेल_गरीबों के लाखों लेकर चंपत हो गया जालसाज..

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हल्द्वानी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में जालसाज ने लोगों को लाखों का चूना लगाया और चम्पत हो गया। जानकारी के लिए बता दे यह वह चंपत नहीं है। यह अलग है इसने लोन का झांसा देकर महिलाओं को अपने जाल में फसाया। एक कथित माइक्रो फाइनेंस कंपनी के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि खुद को गुजरात का निवासी बताने वाले कुछ लोगों ने आसान लोन दिलाने का झांसा देकर दर्जनों लोगों से फाइल चार्ज के नाम पर चार-चार हजार रुपये जमा कराए और फिर कार्यालय बंद कर फरार हो गए।

जानकारी के अनुसार, गौजाजाली क्षेत्र में किराये के एक मकान में आईएनसी फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कार्यालय खोला गया था। यहां लोगों से आधार और पैन कार्ड लेकर उनकी सिविल हिस्ट्री जांचने के बाद 40 हजार से 60 हजार रुपये तक का लोन दिलाने का दावा किया गया। इसके बदले प्रत्येक आवेदक से चार हजार रुपये जमा कराए गए और एक तय तारीख पर लोन खाते में आने का भरोसा दिया गया।

जब तय तारीख गुजर गई और किसी के खाते में पैसा नहीं पहुंचा, तो सोमवार रात बड़ी संख्या में लोग कार्यालय पहुंचे। वहां ऑफिस पर ताला लटका मिला और अंदर सिर्फ मेज-कुर्सियां थीं। इसके बाद पीड़ितों ने मौके पर हंगामा किया। सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची और लोगों को शांत कराया।

इंद्रानगर निवासी वकील अहमद ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि इस गिरोह में एक महिला और चार पुरुष शामिल थे, जो खुद को गुजरात का रहने वाला बताते थे। एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने बताया कि अब तक करीब 20 लोगों की शिकायत मिली है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि स्थानीय लोगों का दावा है कि पीड़ितों की संख्या 100 के करीब हो सकती है।

मकान मालिक भी जांच के दायरे में

जांच में सामने आया है कि जिस मकान से कथित कंपनी संचालित हो रही थी, उसके मालिक ने किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था। पुलिस अब सत्यापन न कराने पर कार्रवाई की तैयारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि मकान मालिक की इस मामले में कोई भूमिका तो नहीं थी।

एक ही परिवार के कई लोग बने शिकार

पीड़ितों के अनुसार, अधिक लोन पाने की उम्मीद में कई परिवारों ने अपने दो से चार सदस्यों के नाम पर आवेदन किए और सभी ने अलग-अलग चार-चार हजार रुपये जमा किए। चार जुलाई तक लोन मिलने का भरोसा दिया गया, लेकिन तय समय बीतते ही कथित कंपनी का पूरा कार्यालय गायब मिला। सबसे अधिक नुकसान गरीब और जरूरतमंद परिवारों को हुआ, जिन्होंने उम्मीद में अपनी मेहनत की कमाई जमा कर दी।

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