Watch_ MBPG में किसका पलड़ा भारी…?

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हल्द्वानी_कुमाऊं की छात्र राजनीति के सबसे बड़े मंच एमबीपीजी कॉलेज में नामांकन के साथ ही चुनावी तस्वीर अब खुलकर सामने आने लगी है। शुक्रवार को नामांकन के बाद अध्यक्ष पद के तीनों प्रमुख दावेदारों ने अपने-अपने समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन कर पावर दिखाई कि मैदान में उनकी पकड़ मजबूत है। नैनीताल रोड पर उमड़ी भीड़, नारे और समर्थकों का जोश बता रहा था कि 29 सितंबर का मुकाबला महज चुनाव नहीं, बल्कि छात्र राजनीति में वर्चस्व की जंग बनने जा रहा है।

अध्यक्ष पद पर एबीवीपी के धीरज बिष्ट, एनएसयूआई के मेहुल शाह और एबीवीपी से बागी होकर निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन बेलवाल आमने-सामने हैं। तीनों प्रत्याशी अपने-अपने दावों के साथ मैदान में हैं और हर कोई छात्रों के बीच अपनी पकड़ मजबूत होने का दावा कर रहा है।

नामांकन के बाद धीरज बिष्ट ने भरोसा जताया कि छात्र उन्हें एकतरफा समर्थन देंगे और इसका फैसला 29 सितंबर को सामने आएगा। इसके बाद धीरज के समर्थन में नैनीताल रोड पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। छात्र-छात्राओं के साथ एबीवीपी के पदाधिकारी और छात्र नेताओं की मौजूदगी ने उनके प्रदर्शन को संगठनात्मक ताकत की पावर दिखी।

वहीं, आर्यन बेलवाल भी तेवर में नजर आए। एबीवीपी से बगावत कर निर्दलीय मैदान में उतरे आर्यन ने कहा कि वह पिछले चार वर्षों से छात्रों के बीच लगातार काम करते रहे हैं और छात्र हित व छात्र एकता के लिए हमेशा उपलब्ध रहे हैं। उन्हें भरोसा है कि उनकी मेहनत का जवाब छात्र अपने वोट से देंगे। नामांकन के बाद आर्यन समर्थकों ने भी जुलूस निकालकर अपनी ताकत का अहसास कराया।

दूसरी ओर एनएसयूआई के मेहुल शाह नामांकन से पहले अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने गुरुजनों के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर चुनावी मैदान में उतरे। नामांकन के बाद मेहुल ने दावा किया कि लंबे समय से बंद छात्रावास को खुलवाया है। इसके अलावा वो छात्रों से जुड़े कई मुद्दों पर वह लगातार काम करते रहे हैं। उनका कहना था कि छात्रों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है और 29 सितंबर का परिणाम उनके पक्ष में आएगा।

नामांकन के बाद मेहुल के समर्थन में भी नैनीताल रोड पर बड़ा शक्ति प्रदर्शन हुआ। लंबे समय बाद एनएसयूआई एकजुट और पूरी ताकत के साथ मैदान में नजर आई। पुराने छात्र नेताओं से लेकर नए छात्र नेताओं, संगठन के पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी ने मेहुल के शक्ति प्रदर्शन को खास बना दिया।

एमबीपीजी में छात्रसंघ चुनाव का इतिहास सिर्फ पदों की लड़ाई का इतिहास नहीं रहा है। यहां से निकली छात्र राजनीति ने समय-समय पर कुमाऊं की सियासत को दिशा देने वाले चेहरे भी दिए हैं। यही वजह है कि एमबीपीजी की अध्यक्ष पद की कुर्सी को लेकर होने वाला मुकाबला कॉलेज की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं है।

इस बार भी कहानी सिर्फ तीन प्रत्याशियों की नहीं है। एक तरफ संगठन की ताकत है, दूसरी तरफ वर्षों की छात्र राजनीति और व्यक्तिगत पकड़ का दावा है, तो तीसरी तरफ बगावत के बाद निर्दलीय मैदान में उतरे प्रत्याशी की चुनौती। धीरज अपने काम और संगठन के भरोसे हैं, मेहुल एकजुट छात्र शक्ति के दावे के साथ मैदान में हैं और आर्यन अपनी चार साल की मेहनत को सबसे बड़ा हथियार बता रहे हैं।

अब फैसला छात्रों के हाथ में है। 29 सितंबर को एमबीपीजी के हजारों छात्र-छात्राएं अपने मताधिकार से तय करेंगे कि कॉलेज की छात्र राजनीति की कमान किसके हाथ जाएगी।

हालांकि नामांकन के बाद हुए शक्ति प्रदर्शनों ने मुकाबले की गर्मी जरूर बढ़ा दी है, लेकिन किसके दावे में कितना दम है और किसकी भीड़ वोट में बदलती है, इसका असली जवाब चुनाव परिणाम ही देगा। अब इंतजार कीजिए 29 सितंबर का।

कुमाऊं की छात्र राजनीति के गढ़ एमबीपीजी में आज ताकत का सुपर शो है, अब 29 सितंबर को यही ताकत वोट बनकर किसके पक्ष में उतरती है, इस पर पूरे कुमाऊं की नजर रहेगी। यही नहीं 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी इस रिजल्ट का काफी असर पड़ सकता है।

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