

उत्तराखंड में दिवाली के बाद यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी बिल को लाने की तैयारी हो चुकी है. राज्य सरकार दिवाली के तुरंत बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने वाली है, जिसमें यूनिफॉर्म सिविल कोड पर चर्चा की जाएगी. सदन में विधायकों के साथ चर्चा के बाद इसे बिल पास कर दिया जाएगा. माना जा रहा है कि इसके कानून बनने में भी ज्यादा वक्त नहीं लगना चाहिए. ऐसे में ठंडे बस्ते में गया यूसीसी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
ucc पर प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कर दिया है कि सरकार जल्द से जल्द प्रदेश मे UCC लागू करने कि पक्षधर है सीएम धामी ने साफ कहा कि UCC कमेटी की रिपोर्ट अंतिम चरण मे है और जैसे हीं UCC कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी हम इसको लागू करने के लिए आगे की कार्यवाई करने के लिए कदम आगे बढ़ाएंगे।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उत्तराखंड विधानसभा में जो मसौदा विधेयक पेश किया जाएगा उसमें सरकार ने बहुविवाह पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात की है। इसके साथ ही लिव-इन में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन कराने की व्यवस्था की गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया है कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस रंजन प्रकाश देसाई के नेतृत्व वाली पांच सदस्यों की कमिटी सरकार को अपनी रिपोर्ट जल्द ही सौंपने वाली है. इस रिपोर्ट को अगले हफ्ते की शुरुआत में दिए जाने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि रिपोर्ट के मिलते ही विशेष सत्र बुला लिया जाएगा. ये भी उम्मीद है कि केंद्र सरकार अपने यूसीसी बिल को तैयार करने के लिए उत्तराखंड सरकार के यूसीसी बिल का इस्तेमाल कर सकती है।
उत्तराखंड अगले सप्ताह समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है। सूत्रों से यह जानकारी मिली है। यूसीसी कोड भारत के सभी नागरिकों पर लागू होगा।उत्तराखंड अगले सप्ताह समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने वाला पहला राज्य बनने जा रहा है। सूत्रों से यह जानकारी मिली है। यूसीसी कोड भारत के सभी नागरिकों पर लागू होगा।यह विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने सहित अन्य व्यक्तिगत मामलों से निपटने में एक जैसा कानून लागू करेगा चाहे संबंधित व्यक्ति का धर्म कोई भी हो।
यूसीसी में क्या खास देखने को मिल सकता है?
सूत्रों का कहना है कि कमिटी की रिपोर्ट को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक, इसमें लैंगिक समानता और पैतृक संपत्तियों में बेटियों के लिए समान अधिकार की बात कही गई है. रिपोर्ट में महिलाओं की शादी की उम्र को बढ़ाकर 21 साल करने का कोई जिक्र नहीं है. कमिटी की तरफ से सिफारिश में कहा गया है कि महिलाओं की शादी की उम्र को 18 साल ही रखना चाहिए. इस बिल का मकसद एक ऐसा कानून बनाना है, जो शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने से जुड़े मामलों में सभी धर्मों पर लागू हो।
सूत्रों के मुताबिक, बिल में ज्यादा फोकस व्यक्तिगत कानूनों जैसे शादी के लिए रजिस्ट्रेशन, तलाक, संपत्ति अधिकार, अंतर-राज्य संपत्ति अधिकार, रखरखाव, बच्चों की कस्टडी आदि में एकरूपता लाने पर है. प्रस्तावित कानून में न तो विवाह के लिए किसी धार्मिक रीति-रिवाज का जिक्र किया गया है और न ही ये अन्य धार्मिक अनुष्ठानों पर केंद्रित है. इस कानून के तहत लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य कर दिया जाएगा. उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी लागू करने को लेकर 27 मई, 2022 को एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया था।



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