थप्पड़ ने भड़काया आक्रोश – नर्सिंग भर्ती विवाद दून में उबाल

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दून में आक्रोश भड़का : नर्सिंग भर्ती विवाद के बीच कॉन्स्टेबल ने प्रदर्शनकारी पर जड़ा थप्पड़

राजधानी देहरादून में नर्सिंग कर्मचारियों के सीएम आवास कूच के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए, जब झड़प के बीच एक महिला कॉन्स्टेबल ने प्रदर्शन कर रही महिला नर्सिंग अधिकारी को जोरदार थप्पड़ मार दिया। घटना का वीडियो वायरल होते ही नर्सिंग समुदाय और बेरोजगार संगठनों में जोरदार आक्रोश फैल गया। कई संगठन खुलकर नर्सिंग कर्मचारियों के समर्थन में आ गए हैं।

क्या है मामला?

5 दिसंबर से नर्सिंग कर्मचारी नर्सिंग अधिकारी भर्ती प्रक्रिया में बदलाव के विरोध में देहरादून के एकता विहार में धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को वे अपनी मांगों को लेकर सीएम आवास की ओर कूच कर रहे थे। दिलाराम चौक के पास भारी पुलिस बल तैनात था। दोपहर के वक्त पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, जिसके बाद स्थिति गर्म हो गई।

महिला कॉन्स्टेबल और प्रदर्शनकारी के बीच..

झड़प के दौरान महिला कॉन्स्टेबल ने हरिद्वार निवासी सपना चौधरी को हटाने की कोशिश की, लेकिन जब वह नहीं हटीं तो पुलिसकर्मी ने उन्हें थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद दोनों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। मौके पर अफरा-तफरी मच गई और अन्य महिला प्रदर्शनकारी भी बीच-बचाव के लिए आगे आईं। अंततः पुलिस ने प्रदर्शनकारी महिला को गाड़ी में बैठाकर मामला शांत किया।

घटना मोबाइल में रिकॉर्ड हो गई, जिसके बाद वीडियो वायरल होने पर विरोध और ज्यादा तेज हो गया।

क्यों नाराज़ हैं नर्सिंग कर्मचारी?

नर्सिंग एकता मंच और बेरोजगार नर्सिंग अधिकारी सरकार द्वारा की गई नई भर्ती प्रक्रिया के विरोध में हैं। उनकी मांग है कि-

नर्सिंग कर्मचारियों की 5 मुख्य मांगें

1.वर्षवार/सीनियरिटी आधारित भर्ती हो, जैसा कि पिछली सभी भर्ती प्रक्रियाओं में होता आया है।

2.IPHS मानकों के अनुसार कम से कम 2500+ पदों पर नई भर्ती हो।

3.उत्तराखंड मूल निवासियों को भर्ती में प्राथमिकता दी जाए।

4.ओवर-एज अभ्यर्थियों को आयु सीमा में विशेष छूट मिले।

5.भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो, क्योंकि परीक्षा आधारित नई प्रक्रिया से कई योग्य अभ्यर्थी बाहर हो रहे हैं।

पिछली भर्तियों पर भी विवाद

नर्सिंग सेवा संघ के अध्यक्ष विजय चौहान के अनुसार

2016 में बैकलॉग पदों पर नियुक्तियां हुईं।

2021 में नियमावली संशोधन के बाद 2600 पदों का विज्ञापन जारी हुआ, लेकिन आंदोलन के चलते प्रक्रिया रोक दी गई।

बाद में सीनियरिटी के आधार पर लगभग 3000 नियुक्तियां 2025 तक कर दी गईं।

अब सरकार ने फिर केवल 100 से अधिक पदों पर परीक्षा-आधारित भर्ती का विज्ञापन निकाला है, जिसे कर्मचारी गलत मान रहे हैं।

नर्सिंग मंच का कहना है कि पहले जहां सीनियरिटी के आधार पर नियुक्तियां होती थीं, अब परीक्षा के जरिए भर्ती करना हजारों उम्मीदवारों को नुकसान पहुंचाएगा-खासकर उन लोगों को जो आयु सीमा पार कर रहे हैं।

सरकार पर गंभीर आरोप

नर्सिंग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा

धरना स्थल शहर से बाहर तय किया गया ताकि आवाज सरकार तक न पहुंचे।

लिखित परीक्षा के बाद बने पोर्टल को तुरंत बंद किया जाए।

भर्ती प्रक्रिया को पुरानी व्यवस्था (वर्षवार) के अनुसार लागू किया जाए।

स्वास्थ्य संस्थानों में खाली पद तुरंत भरे जाएं।

ओवर-एज अभ्यर्थियों को विशेष आयु-छूट दी जाए।

क्या आगे?

बेरोजगार नर्सिंग अधिकारी पहले ही मुख्यमंत्री को खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा जता चुके हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द परिस्थितियों पर निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। महिला कॉन्स्टेबल द्वारा थप्पड़ मारने की घटना ने इस विरोध को और भड़का दिया है।

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