
उत्तराखंड के रामगढ़ में उद्यान भूमि बचाने के लिए पूर्व विधायक के नेतृत्व में ग्रामीणों ने धरना प्रदर्शन और नारेबाजी की। उनका कहना था कि सरकारी भूमि को हिमांचाल की तर्ज पर विकसित किया जाए नाकि
भूमि और संसाधनों को बेचने का काम किया जाए।
नैनीताल जिले में फल पट्टी कही जाने वाली रामगढ़ की भूमि को उद्यान विभाग से लेकर निजी हाथों में देने की सुगबुगाहट से रामगढ़ भूमि बचाओ संघर्ष समिति के आंदोलनकारी धरने पर बैठ गए हैं। पूर्व विधायक दान सिंह भंडारी के नेतृत्व में उन्होंने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
उनका कहना है कि सरकार कृषि कार्य के लिए जमीन हस्तांतरण कर सकती है जबकि उद्योग लगाने के लिए जनता किसी भी हाल में सहमत नहीं होगी। उन्होंने कहा की इस राज्य को निर्माण के बाद हिमांचाल की तर्ज पर विकसित किया गया था। पूर्व विधायक ने कहा कि हमारी सरकारें भूमि और संसाधनों को बेचने का काम कर रही है। यहां सुंदर भौगोलिक क्षेत्र होने से पर्यटक हमेशा आता है। सरकार फ्रूट प्रोसैसिंग के क्षेत्र में कार्य करे। सरकार इसे जोशीमठ और केदारनाथ जैसा बनाने में तुली है। सरकार ने जमीन को अपने हाथों में लेकर ग्रामीणों के हित में कार्य करना चाहिए। आरोप लगाया कि उद्यान की 4.4 एकड़ जमीन जनता को छल कर हस्तांतरित कर दी गई। मानकों के अनुसार 80 फीसदी जनता से राय लेना जरूरी था।
वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती


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