दुनियाभर के विशेषज्ञ एक मंच पर, एमआईईटी कुमाऊं में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन..

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हल्द्वानी। स्वास्थ्य सेवाओं के बदलते दौर में नई तकनीक, शोध और अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल को लेकर एमआईईटी कुमाऊं कॉलेज ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। “Interdisciplinary Approach in Allied Health Sciences” विषय पर आयोजित यह सम्मेलन 11 और 12 सितंबर 2026 को एमआईईटी कुमाऊं परिसर में होगा।

सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम, न्यूजीलैंड, फ्रांस और इंग्लैंड समेत विभिन्न देशों के विशेषज्ञ और वक्ता शामिल हो रहे हैं। इसके अलावा उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य राज्यों के करीब 50 महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से विद्यार्थी, शोधार्थी और शिक्षाविद भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

न्यूरो रिहैबिलिटेशन से लेकर रेडियोलॉजी तक चर्चा

सम्मेलन में विशेषज्ञों ने स्वास्थ्य विज्ञान के अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे नए शोध और तकनीकी बदलावों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। फ्रांस की डॉ. कुमारी नम्रिता ने बुजुर्गों में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं की फिजिकल थेरेपी, जबकि इंग्लैंड की दीपिका खनाल ने Allied Health के बढ़ते कार्यक्षेत्र पर अपनी बात रखी।

वहीं डॉ. शीतल मल्हान ने न्यूरो रिहैबिलिटेशन में इंटरडिसिप्लिनरी मॉडल और डॉ. साक्षी भटनागर ने न्यूरोप्लास्टिसिटी व फिजियोथेरेपी पर जानकारी दी।

रेडियोलॉजी के क्षेत्र में प्रो. (डॉ.) मोहम्मद उस्मान खान ने Allied Health Sciences के अतीत, वर्तमान और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं कृपानंद यादव ने रेडियोग्राफर की भूमिका, मरीजों की सुरक्षा और रेडिएशन प्रोटेक्शन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

मेडिकल बायोकेमिस्ट्री और पैथोलॉजी से जुड़े सत्रों में डॉ. ज्ञानेंद्र अवस्थी ने पैथोलॉजी लैब में क्वालिटी कंट्रोल, जबकि डॉ. पवन जोशी ने जेनेटिक एडिटिंग में हो रही प्रगति, उसके क्लिनिकल उपयोग और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। इमरान अहमद अंसारी ने ऑप्टोमेट्री और Allied Health Education के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए।

छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिए बड़ा अवसर

सम्मेलन का उद्देश्य सिर्फ विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को देश-दुनिया में हो रहे नवीनतम शोध और तकनीकी विकास से जोड़ना भी है। आयोजकों के मुताबिक अलग-अलग स्वास्थ्य विज्ञान विषयों के बीच सहयोग बढ़ने से भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, शोध और नवाचार को नई दिशा मिल सकती है।

एमआईईटी कुमाऊं के प्रबंध निदेशक एवं पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बी.एस. बिष्ट ने कहा कि आज के समय में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विभिन्न स्वास्थ्य विज्ञान विषयों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को वैश्विक विशेषज्ञों से सीधे संवाद और नवीनतम ज्ञान हासिल करने का अवसर देते हैं।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन के माध्यम से अनुसंधान, नवाचार और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के साथ Allied Health Sciences के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय अकादमिक सहयोग को भी मजबूत किया जाएगा।

दमदार टैगलाइन

“हल्द्वानी में जुटा दुनिया का स्वास्थ्य ज्ञान, नए शोध और तकनीक से संवरेगा इलाज का भविष्य।”

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