हाईकोर्ट ने कैंचींधाम क्षेत्र में अनियमितता की शिकायत पर लिया स्वतः संज्ञान, जवाब मांगा

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उच्च न्यायालय को मिले पत्र में कैंचींधाम और आसपास हो रहे अनियंत्रित निर्माण और आर्थिक अनियमितता की जानकारी पर मुख्य न्यायाधीश ने कैंचींधाम पर सुओ मोटो कॉग्निजेंस(स्वतः संज्ञान)ले लिया है। मुख्य न्यायाधीश मंनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सरकार से इसपर जवाब मांगा है। न्यायालय ने अधिवक्ता धर्मेंद्र बर्थवाल को मामले में एम एकस क्यूरी(न्याय मित्र)बनाया है।


कैंचींधाम और आसपास पिछले कुछ वर्षों में बाबा के भक्तों की अत्यधिक भीड़ आने से वहां कई किसम की अनियमितताएं होने लगी हैं। इसमें ट्रैफिक और अतिक्रमण मुख्य पहलू हैं। इसके अलावा यहां खुले व्यवसाय के द्वार और भक्तों की भीड़ से सीवेज, नो पार्किंग नए व्यावसायिक निर्माण आदि परेशानी का सबब बना हुआ है। कैंचीं धाम ट्रस्ट ने कुछ समय पहले राज्य में आई प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री को 2.50 करोड़ रुपये की मदद दी थी।

इसके अलावा ट्रस्ट ने बीते दिनों बी.ड़ी.पाण्डे अस्पताल में अत्याधुनिक एक्स-रे और अल्ट्रा साउंड मशीन डोनेट की थी।


शिकायतकर्ता पिथौरागढ़ निवासी ठाकुर सिंह डसीला के पत्र पर न्यायालय ने सुओ मोटो कॉग्निजेंस लिया जिसमें, प्रमुख सचिव लोक निर्माण विभाग, चीफ स्टैंडिंग काउंसिल, परिवहन सचिव, अध्यक्ष ऊत्तराखण्ड पर्यावरण संरक्षण, जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पार्टी बनाया है।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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