शिक्षा नीति से लेकर भविष्य की चुनौतियों तक, यूओयू में हुआ ज्ञान और विचारों का संवाद

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हल्द्वानी, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को समझने, उसके व्यापक उद्देश्यों पर संवाद करने और उच्च शिक्षा में संभावित बदलावों पर मंथन के साथ उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) और राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा), नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आठ दिवसीय एनईपी अभिमुखीकरण एवं संवेदीकरण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया।

7 से 15 सितंबर तक ऑनलाइन आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से करीब 180 शिक्षकों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने सहभागिता की। आठ दिनों के दौरान एनईपी 2020 के विभिन्न आयामों पर केंद्रित 16 अकादमिक सत्रों में विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच विचारों एवं अनुभवों का व्यापक आदान-प्रदान हुआ।

समापन अवसर पर यूओयू के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने कार्यक्रम को उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण अकादमिक पहल बताया। उन्होंने आयोजन से जुड़े समन्वयकों और पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षकों और शिक्षाविदों को नीतिगत विमर्श से जोड़ने के साथ उन्हें नए विचारों और अनुभवों को साझा करने का मंच देते हैं।

कुलपति ने यूओयू और नीपा के बीच अकादमिक सहयोग को भविष्य में और व्यापक बनाने पर जोर दिया। उन्होंने संयुक्त प्रशिक्षण, शोध एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियों की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की अपेक्षा व्यक्त की।

कार्यक्रम के स्थानीय समन्वयक एवं यूओयू की शिक्षाशास्त्र विद्याशाखा के निदेशक प्रो. डिगर सिंह फर्स्वाण ने कुलपति, नीपा की कुलपति प्रो. शशिकला वंजारी, विशेषज्ञों, समन्वयकों और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम ने एनईपी की समझ को व्यापक बनाने के साथ देश के अलग-अलग राज्यों के शिक्षकों और शिक्षाविदों को एक साझा अकादमिक मंच पर संवाद का अवसर दिया।

उन्होंने भविष्य में यूओयू और नीपा के बीच संयुक्त शैक्षणिक, प्रशिक्षण एवं शोधपरक गतिविधियों को और आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।

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