पारंपरिक ज्ञान से AI तक पहुंची हिंदी, यूओयू में भाषा के भविष्य पर हुआ मंथन

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हल्द्वानी, उत्तराखण्ड मुक्त विश्वविद्यालय में हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा-2026 का शुक्रवार को समापन हुआ। ‘पारंपरिक ज्ञान से कृत्रिम बुद्धिमत्ता तक’ विषय पर आयोजित समारोह में हिंदी के बदलते स्वरूप, तकनीकी विकास और वैश्विक विस्तार पर मंथन किया गया।

कुलपति एवं संरक्षक प्रो. नवीन चंद्र लोहनी ने तकनीकी युग में हिंदी के सतत विकास पर जोर देते हुए कहा कि भाषा को आधुनिक तकनीकी अनुप्रयोगों से जोड़कर उसकी उपयोगिता और पहुंच को लगातार बढ़ाने की जरूरत है।

मुख्य वक्ता एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्राध्यापक डॉ. विजया सती ने हंगरी और बुडापेस्ट में हिंदी के प्रचार-प्रसार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रवासी हिंदी साहित्य और विश्व के विभिन्न देशों में हिंदी के अध्ययन-अध्यापन की स्थिति पर भी प्रकाश डाला।

मुख्य अतिथि प्रो. दिवा भट्ट ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंधों को रेखांकित करते हुए कहा कि “हिंदी भाषा एक सतरंगी छाता है, जिसके अंदर समस्त भारतीय भाषाएँ हैं।” मानविकी विद्याशाखा के निदेशक गिरिजा पांडे ने हिंदी को देश के भीतर व्यापक संपर्क की भाषा बताया।

कार्यक्रम की प्रस्तावना डॉ. शशांक शुक्ल ने रखी। उन्होंने बदलती तकनीकी दुनिया के अनुरूप हिंदी को तैयार करने और नई तकनीक में उसकी उपयोगिता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। संचालन डॉ. पुष्पा बुढलाकोटी ने किया, जबकि डॉ. अनिल कार्की ने हिंदी पखवाड़े की गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. राजेंद्र कैड़ा ने किया।

समापन अवसर पर विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को अतिथियों द्वारा पुस्तकें और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। निबंध प्रतियोगिता में कृतिका त्रिवेदी, शाने अली और डॉ. रुचि पांडे, व्याकरण प्रतियोगिता में डॉ. मीतु भट्ट, कमलेश पथनी और हेम छिमवाल तथा स्लोगन प्रतियोगिता में रेनू भट्ट, कृतिका त्रिवेदी और स्वाति उपाध्याय को सम्मानित किया गया।

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