“विकास भी, विरासत भी चंपावत को मिली नई उड़ान” 57 करोड़ से बन रहा साइंस सेंटर

शीतकालीन पर्यटन, साहसिक गतिविधियों और ऐतिहासिक धरोहरों के संगम से चमका सीमांत जनपद
पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय, देहरादून से वर्चुअल माध्यम से ‘चंपावत सरस कॉर्बेट महोत्सव–2026’ का शुभारम्भ कर सीमांत जनपद के विकास को नई गति देने का संदेश दिया। उन्होंने इस अवसर पर “विकास भी और विरासत भी” के संकल्प को दोहराते हुए चंपावत को आदर्श जिला बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव केवल सात दिनों का आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक गरिमा, प्राकृतिक वैभव, मातृशक्ति की ऊर्जा और युवाओं के उत्साह का जीवंत उत्सव है। होली के निकट आते पर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने काली कुमाऊँ की बैठकी, खड़ी होली और चौफुला जैसी समृद्ध परंपराओं को प्रदेश की विशिष्ट पहचान बताया।
शीतकालीन कॉर्बेट महोत्सव : पर्यटन को नई दिशा
इस वर्ष महोत्सव को “शीतकालीन कॉर्बेट महोत्सव” के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जिससे शीतकालीन पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पैराग्लाइडिंग, माउंटेन बाइकिंग, हॉट एयर बलून, रिवर राफ्टिंग, पैरामोटरिंग, बर्ड वॉचिंग और ट्रेकिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से चंपावत को राष्ट्रीय साहसिक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रसिद्ध शिकारी एवं संरक्षणवादी जिम कॉर्बेट का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी आत्मकथाओं ने चंपावत-लोहाघाट क्षेत्र को वैश्विक पहचान दिलाई। वर्ष 1907 में चंपावत की आदमखोर बाघिन का अंत कर उन्होंने सैकड़ों लोगों की जान बचाई थी, जो आज भी साहस और इतिहास का प्रतीक है।
स्वास्थ्य से आधारभूत संरचना तक विकास की रफ्तार
जनपद में 20 करोड़ रुपये की लागत से 50 बेड का क्रिटिकल केयर ब्लॉक जिला अस्पताल में निर्माणाधीन है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को बड़ा विस्तार मिलेगा।
जाम की समस्या के स्थायी समाधान हेतु मल्टीस्टोरी पार्किंग और प्रमुख सड़कों का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है।
टनकपुर – जौलजीबी मार्ग पर 55 करोड़ रुपये से स्पान आर्च पुल और 33 करोड़ रुपये से सड़क सुधारीकरण कार्य जारी है।
भारत-नेपाल सीमा पर 177 करोड़ रुपये की लागत से ड्राई पोर्ट निर्माणाधीन है, जो क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।
धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
मानसखण्ड मंदिर माला मिशन के अंतर्गत देवीधूरा वाराही मंदिर के विकास कार्य में तेजी लाई गई है।
माँ पूर्णागिरी मंदिर के लिए लगभग 45 करोड़ रुपये की लागत से रोपवे निर्माणाधीन है, जो श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करेगा।
टनकपुर से बनबसा तक शारदा रिवर फ्रंट विकसित कर “शारदा कॉरिडोर” के माध्यम से पूर्णागिरी धाम, चूका, श्यामलाताल और शारदा घाट को जोड़ा जाएगा।
विज्ञान, रोजगार और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
57 करोड़ रुपये से साइंस सेंटर का निर्माण विज्ञान और नवाचार को नई दिशा देगा।
वे-साइड एमेनिटीज सेंटर और चूका क्षेत्र को वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है।
महोत्सव में मधुबनी चित्रकला, आधुनिक कला कार्यशालाएं, विज्ञान प्रदर्शनी, क्विज प्रतियोगिताएं और खाद्य उत्सव स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन ‘Vocal for Local’ की भावना को मजबूत करते हुए ‘Local for Global’ की दिशा में बड़ा कदम है, जिससे स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
आदर्श चंपावत की ओर मजबूत कदम
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि विकास कार्यों की सूची लंबी है और उनका संकल्प अटल है,, चंपावत को आदर्श जिला बनाए बिना विश्राम नहीं।
“विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में सरकार निरंतर अग्रसर है।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि चंपावत अब सीमांत नहीं, बल्कि संभावनाओं का अग्रिम मोर्चा बन चुका है।


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