

उत्तराखंड में रुद्रप्रयाग जिले के गौरीकुण्ड से एक बार फिर बड़ी दुःखद खबर है, गौरीकुंड में भूस्खलन की चपेट में आने से 3 बच्चे मलवे में दब गए, इस दुर्घटना में 2 बच्चों की मौत हो गयी है जबकि 1 बच्चा घायल है जिसका अस्पताल में उपचार चल रहा है।
उत्तराखंड में भारी बारिश से तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। रुद्रप्रयाग में एक बार फिर से भूस्खलन हुआ है। बुधवार सुबह गौरीकुंड में एक बार फिर से लैंडस्लाइड हुई है और इसमें दो बच्चों की मौत हो गई है। जानकारी के मुताबिक इस भूस्खलन की चपेट में तीन नेपाली मूल के बच्चे आए थे, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों में दो बच्चों को मृत घोषित कर दिया, जबकि एक का इलाज जारी है।
रुद्रप्रयाग के गौरीकुंड लैंडस्लाइड 2 दुकाने ध्वस्त 10 से 12 लोग लापता बताये जा रहे है।
गौरीकुंड में कल देर रात भारी मूसलाधार बारिश के कारण लैंडस्लाइड होने के कारण दो दुकाने क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं,बताया जा रहा है कि 10 से 12 लोग इन दुकानों में काम करते थे पहाड़ी से लगाता बोल्डर गिर रहे हैं जिसके कारण जिसके कारण रेस्क्यू करने में दिक्कत आ रही है जिला प्रशासन की टीम आपदा प्रबंधन की टीम एवं पुलिस टीम एसडीआरएफ डीडीआरएफ़ तमाम टीमें मौके पर हैं ।
लेकिन मूसलाधार बारिश के कारण दुकानों के अंदर रहने वाले लोगों का रेस्क्यू नहीं हो पा रहा है सर्च अभियान जारी, यह घटना कल देर रात की 12:00 बजे की बताई जा रही है मूसलाधार बारिश के कारण रेस्क्यू में आ रही है दिक्कत सभी टीमें मौके पर मौजूद घटना डाक पुलिया के सामने की बताई जा रही है,आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार मोके पर मौजूद रेस्क्यू जारी।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने अवगत कराया कि गौरीकुंड गांव में हेलीपैड से आगे गांव के नीचे एक नेपाली परिवार के ऊपर के खेत से आए मालवा की चपेट में आने के कारण तीन बच्चों के दबाने की सूचना प्राप्त हुई थी राहत बचाव टीम मौके पर पहुंचकर एक बच्ची को सकुशल तथा दो अन्य बच्चों को चिकित्सालय गौरीकुंड पहुंचाया गया है। उन्होंने बताया कि इस घटना में तीन ही बच्चों के दबने की सूचना थी जिसमें बड़ी लड़की स्वीटी 8 वर्ष छोटी लड़की पिंकी 5 वर्ष तथा एक छोटा बच्चा जो मालवे में दबे थे।
उनको अस्पताल पहुंचाया गया है जिनमें से स्वीटी ठीक है जिसका उपचार किया गया है जबकि दो अन्य बच्चों को चिकित्सक द्वारा मृत घोषित कर दिया गया। बच्चों का पिता सत्यराज अपने गांव नेपाल जा रखा है। जबकि माता जानकी बच्चों के साथ ही डेरे में सो रही थी। जानकी मलवे आने के बाद डेरे से बाहर सकुशल निकल आई थी जबकि बच्चे मलबे में दबे रह गए थे।
गौरतलब है कि केदारनाथ यात्रा मार्ग के महत्वपूर्ण पड़ाव गौरीकुंड में 3 अगस्त को भी भूस्खलन हुआ था। 3 अगस्त की रात भारी मूसलाधार बारिश के बाद आए भूस्खलन की चपेट में आकर 3 लोगों की मौत हो गई जबकि 20 लोग लापता हैं। इस भूस्खलन में लापता हुए 20 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।



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