उत्तराखंड के न्याय देवता गोलज्यू के बाल जीवन की कहानी अब बड़े पर्दे पर, ‘बाला गोरिया’ का पोस्टर रिलीज

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‘बाला गोरिया’उत्तराखंड की लोक थाती का नया अध्याय

उत्तराखंड की मिट्टी, लोक आस्था और पहाड़ की सदियों पुरानी लोकगाथाओं को बड़े पर्दे तक पहुंचाने की एक खूबसूरत कोशिश अब आकार ले रही है। न्याय देवता गोलज्यू के बाल जीवन पर आधारित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘बाला गोरिया’ का पोस्टर मुंबई में रिलीज कर दिया गया है।

‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ के बैनर तले बन रही यह फिल्म सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक आस्था, संस्कृति और भावनाओं को नई पीढ़ी और दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास है। फिल्म का पहला टीजर पहले ही जारी किया जा चुका है और अब फिल्म अक्टूबर के पहले सप्ताह में रिलीज होने की तैयारी में है।

पोस्टर लॉन्च के मौके पर अभिनेता हेमंत पांडे, विजेंद्र काला, करण शर्मा, कृष्णा सिंह, निर्देशक नितिन तिवारी और निर्माता मनोज चंदोला मौजूद रहे।

पहाड़ की गोद में हुई पूरी शूटिंग

फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड के बेहद खूबसूरत और दूरस्थ इलाकों में की गई है। बागेश्वर के लीती, तेजम, चकौड़ी के साथ अल्मोड़ा और नैनीताल को फिल्म की कहानी और दृश्यों का हिस्सा बनाया गया है।

निर्माता मनोज चंदोला के मुताबिक, फिल्म का पोस्ट प्रोडक्शन अंतिम दौर में है। खास बात यह है कि फिल्म में AI और BFX जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे उत्तराखंड की लोककथा को आधुनिक सिनेमा की तकनीक के साथ पेश किया जा सके।

लोकगाथा से विश्व पटल तक का सफर

‘हिमाद्रि प्रोडक्शंस’ पिछले करीब तीन दशकों से हिंदी और उत्तराखंड की भाषाओं में फिल्मों और नाटकों के जरिए पहाड़ की संस्कृति से जुड़ा काम कर रहा है। वर्ष 2014 में इसी बैनर ने उत्तराखंड की प्रसिद्ध लोकगाथा पर आधारित ‘राजुला’ फिल्म बनाई थी, जिसे देश के कई PVR सिनेमाघरों में एक साथ रिलीज किया गया था।

अब प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड के लोक देवताओं और लोक आख्यानों को बड़े पर्दे पर लाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। ‘बाला गोरिया’ तीन भागों में बनने वाली श्रृंखला की पहली फिल्म है। इसके अगले भागों में न्याय देवता गोलज्यू के जीवन के अन्य पहलुओं को दिखाया जाएगा।

इसके बाद हरज्यू, सैम, गंगनाथ और ऐड़ी जैसे उत्तराखंड के अन्य लोक देवताओं पर भी फिल्म श्रृंखला बनाने की योजना है।

बच्चों के लिए, पहाड़ की जड़ों से जुड़ी कहानी

‘बाला गोरिया’ की खासियत यह भी है कि यह श्रृंखला की पहली बाल फिल्म है। इसमें उत्तराखंड के बच्चों के साथ मुंबई में काम कर रहे पहाड़ से जुड़े कलाकार भी नजर आएंगे।

निर्माता मनोज चंदोला का कहना है कि इस फिल्म को बनाने के पीछे मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि अपनी लोक थाती, संस्कृति और आस्था को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।

पहाड़ के लोक देवताओं की कहानियां सिर्फ पुरानी कथाएं नहीं हैं। इनमें लोगों की आस्था, न्याय की उम्मीद, संघर्ष और अपनी मिट्टी से जुड़ाव की भावनाएं बसती हैं। ‘बाला गोरिया’ इन्हीं भावनाओं को पर्दे पर उतारने की कोशिश है।

निर्माताओं ने लोगों से फिल्म के प्रमोशन के लिए उत्तराखंड की आम जनता से सपोर्ट की अपील की है।

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