POCSO NDPS व अन्य गंभीर अपराधों में फोरेंसिक रिपोर्ट पर उत्तराखंड हाईकोर्ट का सख्त टाइम-बाउंड आदेश

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ब्रेकिंग न्यूज़_ उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पोक्सो, एन.डी.पी.एस.एक्ट समेत जघन्य अपराध में फोरेंसिक निदेशक को पोक्सो मामले में 45 दिन और जघन्य अपराध में 75 दिन में फोरेंसिक रिपोर्ट पुलिस को तय समय सीमा(टाइम बाउंड)में सौंपने को कहा है तांकि चार्जशीट समय से फ़ाइल की जा सके।

म्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने अगली सुनवाई 30 सितंबर के लिए तय की है। इससे पहले, निर्देशों का पालन करते हुए, DGP और गृह सचिव ने अपने-अपने जवाब में बताया कि 150 पुलिस अधिकारियों की एक ‘जांच सैल'(Investigation Cell) बनाई गई है जिन्हें पूरे राज्य में तैनात किया गया है।


शासकीय अधिवक्ता(जी.ए.)अमित भट्ट ने बताया कि भविष्य की ज़रूरत के अनुसार इस सैल में पुलिस अधिकारियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों का पालन करने के लिए कई अन्य कदम भी उठाए गए हैं, खासकर ‘जोगिंदर कुमार बनाम यू.पी.राज्य’ (1994 (4) SCC 260) और ‘ललिता कुमारी बनाम यूपी राज्य'(2014 (2) SCC 1) के मामलों में।

इन मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने ‘राष्ट्रीय पुलिस आयोग’ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि गंभीर अपराधों को छोड़कर आम मामलों में गिरफ्तारी से बचना चाहिए। सरकारी अधिवक्ता ने कहा कि जोगिंदर कुमार मामले में दिए गए फैसले का पूरी तरह और सही भावना के साथ पालन किया जाना चाहिए।

कहा कि केस दर्ज करने के संबंध में यह कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों, खासकर ललिता कुमारी मामले (ऊपर बताया गया) में तय किए गए कानून का सख्ती से पालन किया जाएगा। इस बारे में सभी अधिकारियों को सर्कुलर भी जारी किए गए हैं और समय-समय पर सभी लंबित जांचों की समीक्षा भी की जाएगी।

ये भी बताया गया कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के निदेशक को निर्देश दिए गए थे कि वे रेप, POCSO, NDPS और अन्य गंभीर अपराधों के मामलों में चार्जशीट दाखिल करने के लिए तय समय-सीमा(यानी मामले के अनुसार 90 दिन और 60 दिन) के भीतर रिपोर्ट सौंपें।

इसलिए, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी को मामले के अनुसार 75 दिन और 45 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट ज़रूर देनी होगी। इस संबंध में, फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के डायरेक्टर को भी एक पत्र जारी किया गया था, जिसे एनेक्शर के तौर पर जोड़ा गया है। खासकर तब जब ट्रायल के लिए साइंटिफिक सबूत सबसे अहम होते हैं।

इसलिए, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी के डायरेक्टर की कानूनी जिम्मेदारी है कि वे चार्जशीट दाखिल करने के लिए एक्ट में तय समय-सीमा के अंदर या उससे पहले संबंधित इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर को रिपोर्ट सौंपें। इस संबंध में, DGP ने सभी SSP को एक सर्कुलर जारी करके निर्देश दिया कि वे इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर को सैंपल इकट्ठा करने के एक हफ्ते के अंदर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजने का आदेश दें।

इसके अलावा, सपथपत्र में यह भी बताया गया है कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में साइंटिफिक ऑफिसर्स की संख्या 11 से बढ़ाकर 28 कर दी गई है। इसलिए, ऐसी स्थिति में, यह न्यायालय उम्मीद और भरोसा करता है कि फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी अपनी सैंपल रिपोर्ट तय समय-सीमा के अंदर सौंप देगी और इस मामले में कोई देरी नहीं होगी।

न्यायालय ने DGP को सलाह देता हुए कहा कि वे हर शहर में रैगुलर ट्रेनिंग प्रोग्राम का इंतजाम करें, जिसमें ट्रायल चलाने का काफी अनुभव रखने वाले ज्यूडिशियल ऑफिसर्स और प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की सेवाएं ली जाएं।


एकलपीठ ने माना कि होम सेक्रेटरी और DGP उठाए गए सभी कदमों को लेकर गंभीर हैं और सपथपत्र के जरिए न्यायालय को इसकी जानकारी दी है, इसलिए इस मामले को इस हद तक इसी उम्मीद और भरोसे के साथ बंद किया जाता है कि भविष्य में वे जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाएंगे।

वहीं मौजूदा मामले में आवेदक के अधिवक्ता ने बताया कि कंपनी का रजिस्टर्ड ऑफिस 6285, बताशन बावली, दिल्ली 110006 पर है और कॉर्पोरेट ऑफिस आवास विकास, रुद्रपुर, उत्तराखंड में है। इसके अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता/डायरेक्टर करुण गुप्ता के माध्यम से, पार्टी/प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया है।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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