नैनीताल बचाने को पद्मश्री अनूप साह आगे आए, हाईकोर्ट के आदेशों का हवाला दिया..

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उत्तराखण्ड के नैनीताल में पद्मश्री से सम्मानित विश्व प्रसिद्ध फोटोग्राफर अनूप साह ने नैनीताल के पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर नगर पालिका को एक पत्र लिखा है। उन्होंने न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए नगर को स्वच्छ बनाने और इसके पर्यावरण संरक्षण के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।


नैनीताल निवासी मेधा पाण्डे ने 24 मार्च 2022 को लॉ छात्रा रहते एक पत्र लिख उच्च न्यायालय से कहा था कि शहर में बांज के सूखे गिरे पत्तों को जलाया जाता है, जो बहुत प्रदूषण करते हैं। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी ने इसे जनहित याचिका मानते हुए संबंधित कार्यालयों से जवाब मांगा। प्रमुख सचिव वन, डी.एम.नैनीताल और ई.ओ.नगर पालिका को नोटिस जारी हुए जिसपर उन्होंने कहा कि नैनीताल पालिका क्षेत्र और आसपास के जंगल में पत्तों को जलाया नहीं जा रहा है। कहा कि इन पत्तों को गड्ढों में डालकर कंपोस्ट खाद बनाई जा रही है। न्यायालय ने इसे रिकॉर्ड में लेते हुए इन विभागों की जिम्मेदारी तय की। न्यायालय ने कहा कि ये इन्हीं की जिम्मेदारी है कि अब पत्तों को नैनीताल शहर या जंगल में जलाया न जाए। न्यायालय ने ये भी साफ किया कि अगर इस व्यवस्था की अवमानना होती है तो उसपर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही होगी। इसी के साथ जनहित याचिका को निस्तारित कर दिया गया।


पद्मश्री अनूप साह ने पालिका को लिखा :- –

1)सभी पर्यटन स्पॉटों में पौलीथीन का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित करें और जहां-जहां संभव है वहां आर.ओ.के प्लांट लगाएं क्योंकि इन स्पॉटों में पर्यटक पानी की बोतल ले जाते हैं। टैक्सी चालकों के लिए लिटर(कूड़ा)बैग रखना अनिवार्य हो।

2) नैनीताल की जनता को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाय। व्यापारिक प्रतिष्ठानों के माध्यम से कचरे को जैविक व अजैविक में पृथक करवाना चाहिए।

3)नैनीताल के घरों में कूड़ा और पत्तियां जलाने वालों पर पालिका विशेष ध्यान दे, क्योंकि इससे जंगलों में आग फैलने का खतरा रहता है।

4)अधिकांश रेस्टोरेंट, ढाबे और ठेले वाले प्लास्टिक के डिस्पोजेबल ग्लास, प्लेटों का उपयोग करते हैं। जिससे अनावश्यक रूप से प्लास्टिक का कचरा बढ़ता है। इनका प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाय।

5)कई जगहों पर आर.ओ.लगाये गये हैं, लेकिन वो काम नहीं कर रहे हैं। इनका ठीक तरह से रखरखाव किया जाए तांकि पर्यटक प्लास्टिक की पानी बोतल खरीदने के बजाए इन्हीं से प्यास बुझाए।

6)नगर में कुछ स्थानों पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में मास कम्पोस्टिंग प्लांट शुरू किये जायं जिससे न केवल कचरा दूर ले जाने की समस्या का हल होगा, बल्कि उपयोगी खाद भी मिल सकेगी।

7)नगरपालिका के कचरा निस्तारण के लिए डंपिंग ग्राउंड बनाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए सरकार से प्रयासों को तेजी दी जाय।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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