नीतीश कुमार ने राज्यसभा के लिए भरा पर्चा_ बिहार का नया सीएम कौन..?

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पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री Nitish Kumar समेत एनडीए के पांच उम्मीदवारों ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान विधानसभा परिसर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री Amit Shah भी मौजूद रहे। नामांकन के मौके पर एनडीए के कई वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक उपस्थित रहे, जिससे पूरे परिसर में राजनीतिक हलचल और उत्साह का माहौल दिखा।

तीन राष्ट्रीय अध्यक्षों का एक साथ नामांकन

इस बार राज्यसभा चुनाव में एक खास और ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिला। जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री Nitish Kumar, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष Nitin Nabin और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष Upendra Kushwaha ने एक साथ राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। बिहार की राजनीति में इसे एक अनोखा और महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षण माना जा रहा है।

इसके अलावा जदयू की ओर से केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री Ramnath Thakur और भाजपा के प्रदेश महामंत्री Shivesh Kumar ने भी अपना नामांकन पत्र दाखिल किया।

एनडीए की एकजुटता का प्रदर्शन

नामांकन कार्यक्रम के दौरान Amit Shah के साथ जदयू के वरिष्ठ नेता Lalan Singh, मंत्री Bijendra Yadav और Shravan Kumar सहित गठबंधन के कई प्रमुख नेता मौजूद रहे। नेताओं ने इसे एनडीए की मजबूती और एकजुटता का प्रतीक बताया।

राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया

राज्यसभा चुनाव के लिए दाखिल नामांकन पत्रों की जांच 6 मार्च को की जाएगी। नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 9 मार्च तय की गई है। यदि आवश्यक हुआ तो 16 मार्च को मतदान कराया जाएगा। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू की जाएगी।

जिन सांसदों का खत्म हो रहा कार्यकाल

बिहार से जिन राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है, उनमें Amarendra Dhari Singh, Prem Chand Gupta, Ramnath Thakur, Upendra Kushwaha और राज्यसभा के उपसभापति Harivansh Narayan Singh शामिल हैं।

नीतीश कुमार ने क्या कहा

मुख्यमंत्री Nitish Kumar ने अपने संदेश में लिखा कि पिछले दो दशकों से अधिक समय से बिहार की जनता का विश्वास और समर्थन उन्हें लगातार मिलता रहा है और उसी के बल पर उन्होंने राज्य की सेवा की है। उन्होंने कहा कि संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा थी कि वे बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों के साथ संसद के दोनों सदनों का भी सदस्य बनें।

उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में भी उनका जनता से संबंध बना रहेगा और वे एक विकसित बिहार के संकल्प के साथ नई सरकार को अपना सहयोग और मार्गदर्शन देते रहेंगे।

विपक्ष ने साधा निशाना

इस राजनीतिक घटनाक्रम पर विपक्ष ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इसे जनता के जनादेश के साथ धोखा बताया, जबकि आरजेडी नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा के दबाव में यह फैसला लिया गया है। आरजेडी नेता Mrityunjay Tiwari और सांसद Manoj Jha ने भी इस फैसले को लेकर सवाल उठाए हैं।

वहीं बिहार के उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary ने Nitish Kumar को बधाई देते हुए कहा कि उनके अनुभव और नेतृत्व से राज्यसभा की गरिमा और मजबूत होगी।

बिहार की राजनीति में नया मोड़

साल 2005 से बिहार की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभा रहे Nitish Kumar लंबे समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं। ऐसे में उनके राज्यसभा जाने के फैसले को बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

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