सूखी ठंड ने संकट बढ़ाया_ पर्यावरण और सेहत दोनों पर मार..

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उत्तराखण्ड के पहाड़ो में इस वर्ष बरसात और बर्फबारी नहीं होने से सूखी ठंड, बीमारी और वनाग्नि की घटनाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञ भी अब मौसम के ऐसेरुख पर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।


सरोवर नगरी नैनीताल में 4 माह से बरसात और बर्फबारी नही होने से हर तरफ सूखा देखने को मिल रहा है। जहाँ एक तरफ झील का जल स्तर पिछले वर्ष के मुकाबले कम हुआ है। पिछले वर्ष 15 जनवरी तक 84फ़ीट 3इंच जल स्तर था वहीं 15 जनवरी 2026 तक 83फ़ीट 7.5इंच जलस्तर है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 7.5इंच कम है।

वहीं बरसात की बात करे तो 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक 2133 एम.एम. बरसात हुई थी तो वही 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक 2344 एम.एम. बरसात हुई है जो पिछले वर्ष के मुकाबले 211 एम.एम. ज्यादा दर्ज की गई है।


इसके साथ ही सूखे के कारण प्राकृतिक स्रोतों पर भी असर देखने को मिल रहा है तो वही दूसरी तरफ सुखी ठंड के कारण अस्थमा के मरीज समेत छोटे बच्चों को बुखार, खांसी और शर्दी से जूझना पड़ रहा है। नैनीताल में लगातार सूखा पड़ने के कारण वनाअग्नि की घटनाएं भी देखने को मिल रही है जिससे वन संपदा को भारी नुक्शान भी पहुँच रहा है।


वहीं डीएसबी कॉलेज के वनस्पति विभाग में प्रफेसर ललित तिवारी ने भी बरसात, बर्फबारी और नमी की कमी को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा सुखी ठंड के कारण पर्यवरण पर सीधा असर पड़ रहा है, कोहरे के प्रकोप अब मैदानों के साथ साथ पहाड़ो में भी दिखने लगा है। सूखे कर कारण जंगलों में आसानी से आग लग रही है जिसके कारण जैव विविधता के साथ वन्यजीव भी प्रभावित हो रहे है।


वही बीड़ी पांडेय अस्पताल के चिकित्सक ने जनता को ठंड से बचने के लिए अपने को गर्म रखने के साथ बीमार व्यक्ति को समय पर दवाई और अस्थमा के मरीज को लगातर समय पर पंप लेने की हिदायत दी है। चिकित्सक का ये भी मानना है कि जो लोग सवेरे और शाम के समय वाक पर निकलते है वे दिन के समय वॉक करे जिससे वे ठंड से बच सके।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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