पत्रकारिता की आड़ में आपराधिक षड्यंत्र ?

ख़बर शेयर करें

DM की चोरी-छिपे कॉल रिकॉर्डिंग करने वाले रोहित गोस्वामी पर कानूनी शिकंजा, ‘हेड लाइन न्यूज’ पोर्टल के वजूद पर उठे गंभीर सवाल।


रामनगर के ऐतिहासिक सरस मेले में जब प्रशासनिक अधिकारी (SDM) स्थानीय जौनसारी संस्कृति के रंग में रंगकर लोक कलाकारों का हौसला बढ़ा रहे थे, तब जनसरोकारों से दूर बैठा एक कथित पत्रकार अपनी घटिया टीआरपी और प्रशासनिक दबाव बनाने की साजिश रच रहा था। लोक संस्कृति के प्रोत्साहन को विवादित बनाकर सनसनी फैलाने के नाकाम फेर में ‘हेड लाइन न्यूज पोर्टल’ चलाने वाले रोहित गोस्वामी ने नैनीताल की जिलाधिकारी (DM) को फोन घुमाया।

लेकिन पत्रकारिता के न्यूनतम मानकों, नैतिकता और कानून की धज्जियां उड़ाते हुए इस कथित पत्रकार ने जिलाधिकारी महोदय की बिना पूर्व सूचना या अनुमति के कॉल को छुपाकर रिकॉर्ड कर लिया और फिर अपने पोर्टल पर प्रसारित कर दिया।


यह साफ तौर पर पत्रकारिता नहीं, बल्कि कानूनी अपराध, गंभीर जालसाजी और प्रशासनिक गरिमा पर हमला है। बिना सहमति किसी भी व्यक्ति—विशेषकर संवैधानिक पद पर बैठे लोक सेवक—की टेलीफोनिक वार्ता रिकॉर्ड कर सार्वजनिक करना भारतीय न्याय संहिता (BNS), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) और निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

सर्वोच्च न्यायालय ने ‘के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ’ मामले में स्पष्ट किया है कि निजता का हनन मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। विभिन्न उच्च न्यायालयों के भी कड़े आदेश हैं कि बिना अनुमति फोन रिकॉर्ड करना और उसे प्रसारित करना एक गैर-जमानती और आपराधिक कृत्य है। प्रशासनिक मर्यादा तार-तार करने के इस ओछे हथकंडे पर सख्त रुख अपनाते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) ने कारण बताओ नोटिस थमाकर रोहित गोस्वामी को 7 दिनों के भीतर साक्ष्यों के साथ जवाब देने का अल्टीमेटम दिया है।

संतोषजनक जवाब न मिलने पर इस कथित पत्रकार पर सीधी आपराधिक कार्रवाई की तैयारी है।


अब असली सवाल उस दुकानदारी पर खड़ा होता है जिसे ‘हेड लाइन न्यूज पोर्टल’ के नाम से चलाया जा रहा है। मीडिया और पत्रकारिता का ‘प’ भी न जानने वाले ऐसे लोग, जिन्हें न तो पत्रकारिता के बुनियादी सिद्धांतों का पता है और न ही कानून की सीमाओं का, एक माइक और मोबाइल उठाकर खुद को पत्रकार घोषित कर रहे हैं।

पूर्व में भी रोहित गोस्वामी द्वारा पत्रकारिता के मानकों को ताक पर रखकर फर्जी, तथ्यहीन और भ्रामक खबरें परोसने के कई मामले सामने आ चुके हैं।


इस पूरे प्रकरण ने जिले के प्रबुद्ध समाज को आक्रोशित कर दिया है। अब समय आ गया है कि प्रशासन ऐसे फर्जी मीडिया संस्थानों और स्वयंभू पत्रकारों के खिलाफ बड़े स्तर पर चाबुक चलाए। जनता और बुद्धिजीवी वर्ग ने नैनीताल प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि केवल नोटिस तक बात सीमित न रहे, बल्कि इस ‘हेड लाइन न्यूज पोर्टल’ का काला चिट्ठा खोला जाए।

क्या यह पोर्टल सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) के नियमों के तहत पंजीकृत है? क्या यह भारत सरकार की डिजिटल मीडिया गाइडलाइन्स का पालन कर रहा है? या फिर यह सिर्फ प्रशासनिक दबाव बनाने और अवैध गतिविधियों को अंजाम देने के लिए बिना अनुमति चलाया जा रहा है ?

प्रशासन को बिना देरी किए ऐसे फर्जी पोर्टल्स की गहन जांच कर इन्हें तुरंत बंद कराना चाहिए और फर्जी पत्रकारों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि मीडिया की साख बची रहे।

Ad Ad Ad
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 Join our WhatsApp Group

👉 Subscribe our YouTube Channel

👉 Like our Facebook Page

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *