स्कूल बंद करना समाधान नहीं, बाघ के आतंक से मुक्ति के लिए ठोस प्लान चाहिए – पनेरू

धानाचूली/नैनीताल –
जाङापानी–धानाचूली क्षेत्र में बाघ के लगातार बढ़ते आतंक को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सोमवार को सड़क पर दिखा। स्थानीय लोगों ने धरना-प्रदर्शन कर वन विभाग और प्रशासन से स्थायी व ठोस कार्ययोजना की मांग की। इस दौरान पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरु ने धरनास्थल से ही वन विभाग के मुख्य संरक्षक, कुमाऊं मंडल के वन संरक्षक और जिलाधिकारी नैनीताल से दूरभाष पर बात कर स्पष्ट शब्दों में कहा कि विद्यालय बंद करना किसी भी तरह से समाधान नहीं है।
पनेरु ने कहा कि सत्ता पक्ष के विधायक और ब्लॉक प्रमुख स्कूल बंद कराने को अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं, जबकि यह गंभीर चिंता और मंथन का विषय है। बाघ के आतंक से निपटने के लिए ठोस, व्यावहारिक और ज़मीनी कार्ययोजना की जरूरत है, न कि बच्चों की शिक्षा पर ताला लगाने की।
पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरु ने तीखे शब्दों में कहा कि बच्चों को शिक्षा से वंचित करना प्रशासनिक विफलता को छुपाने का तरीका है। उन्होंने कहा कि सरकार और वन विभाग को चाहिए कि डर के माहौल को खत्म करने के लिए एक्शन मोड में काम करें, न कि स्कूल बंद कर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ें।
पूर्व दर्जा राज्य मंत्री हरीश पनेरु ने अधिकारियों के सामने कई अहम सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि 5 से 10 किलोमीटर के दायरे में आने वाले विद्यालयों के बच्चों को वन विभाग अपनी सुरक्षा में स्कूल लाने-ले जाने की व्यवस्था करे, अभिभावकों को जागरूक किया जाए, ग्रामीण क्षेत्रों में जानवरों के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित हो और प्रत्येक घर में सोलर लाइट लगाई जाए ताकि अंधेरे में बाघ के खतरे को समय रहते भांपा जा सके।
पनेरु ने मांग की कि तत्काल वन विभाग के विशेषज्ञों की टीम जंगल में तैनात की जाए, ग्रामीणों में फैली दहशत को दूर किया जाए और संवेदनशील इलाकों में पिंजरे लगाए जाएं। इस पर उच्च अधिकारियों ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को समस्या के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
करीब दो घंटे तक चले घेराव के बाद सहमति बनने पर उप जिलाधिकारी धारी अंशुल भट्ट और वन क्षेत्र अधिकारी विजय भट्ट अन्य अधिकारियों के साथ ग्रामीणों की समस्याएं जानने के लिए कुटियाखान की ओर रवाना हुए। मौके पर वन विभाग के तमाम अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
इस दौरान पनेरु और पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल ने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल बंद करने के बजाय विद्यालयों का समय अस्थायी रूप से सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक किया जाए, कुछ समय के लिए प्रार्थना सभा पर रोक लगाई जाए और पढ़ाई का माहौल बनाए रखा जाए।
ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे डर में जीना नहीं चाहते, लेकिन अपने बच्चों की शिक्षा की कुर्बानी भी नहीं देंगे। अब निगाहें प्रशासन और वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं कि बाघ के आतंक से निजात के लिए कितनी गंभीर पहल की जाती है।


लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
GKM News is a reliable digital medium of latest news updates of Uttarakhand. Contact us to broadcast your thoughts or a news from your area. Email: newsgkm@gmail.com




Haldwani : डीएम ने 35 शस्त्र लाइसेंस किए निरस्त,जानिए बड़ी वजह ..
हल्द्वानी/नैनीताल : शराब की दुकानों पर आबकारी विभाग की छापेमारी..
गौला-कोसी-नंधौर में चुगान का रिकॉर्ड ब्रेक, खनन से भरा सरकार का खजाना..
अब 5 बार से ज्यादा चालान तो जाएगा D.L ..जान लें नए नियम
हल्द्वानी में फ़र्ज़ी क्रिकेट लीग वाले विकास का गेम ओवर_32 लाख ठगे थे..