

उत्तराखण्ड में नैनीताल के सातताल में आज युवाओं ने सीजन का अंतिम वृक्षारोपण कर लगभग 740 पौंधे लगाए। युवाओं की टोली ने घने जंगलों के बीच वनाग्नि से खाली पड़ी भूमि रोप दी।
नैनीताल जिले में सातताल झील के समीप जंगलों में वनाग्नि की घटनाओं से वन संपदा को बहुत नुकसान हुआ था। वन्यजीव प्रेमियों ने मॉनसून सीजन में ऐसे जले जंगलों और खाली स्थानों में वृक्षारोपण किया।
सातताल में रहने वाले प्रमुख पर्यावरण प्रेमी गौरी राणा ने बताया कि उन्होंने इस सीजन जून माह से कुमाऊं के पहाड़ी क्षेत्र गर्भयांग, अस्कोट, रानीखेत, अल्मोड़ा के हवलबाग, नैनीताल के कैंचीं, पंगोट, भवाली, भीमताल और अब सातताल में लगभग 13,400 पेड़ लगाए हैं।
उन्होंने आगजनी से जली वन संपदा को दोबारा जीवित करने के लिए अनेकों वृक्षारोपण कार्यक्रम किये, जिसके लिए उन्होंने युवाओं को प्रेरित किया और अलग अलग संगठनों के साथ हाथ मिलाया। आज उन्होंने नैनीताल की ‘नासा’, ‘जय श्री राम सेवा दल’ और ‘हनुमान भक्त’ संगठन के लोगों के साथ मिलकर 740 से अधिक वृक्ष लगाए।
इसमें पुतली, आंवला, बांज, थुनेर, जंगली इमली, पांगड, त्युडॉ, देवदार, तुसारू, बांस, रीठा, सुरई, कोइराल और निगाल के पौंधे लगाए। जून से शुरू कर आज इस वर्ष का इसका समापन किया गया है। आज गौरी राणा के साथ यशपाल रावत, मनीष व्हीलर, पंकज बिष्ट, भूपेंद्र सिंह बिष्ट, किशोर ढेला, तेनजिन ‘टेंडॉ’, ध्रुव पाण्डे, गौरव पंत, नमन साह, हरित पाण्डे आदि ने सातताल के जंगल, भकक्तुडा और जून स्टेट में वृक्षारोपण किया।
वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती


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