कैंची धाम की भीड़ ने खड़े किए बड़े सवाल,, स्थानीय परेशान हैं_ ट्रैफिक रोकना समाधान नहीं

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हल्द्वानी/नैनीताल।
कैंची धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब अब पहाड़ों की सड़कों पर बड़ी चुनौती बन गया है। लंबे वीकेंड और मौसम साफ होने के बाद नैनीताल, कैंची धाम, भवाली और भीमताल की ओर 35 हजारों वाहनों की एंट्री ने ट्रैफिक व्यवस्था की पूरी परीक्षा ले ली। हालात ऐसे हैं कि हल्द्वानी से अल्मोड़ा का सफर कुछ घंटे में पूरा करने वाले लोगों को कई-कई घंटे जाम में फंसे रहना पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा मार उन स्थानीय लोगों और मरीजों पर पड़ रही है, जिनका रोजमर्रा का सफर इन्हीं सड़कों पर निर्भर है। बुजुर्गों, मरीजों, बच्चों और जरूरी सामान लेकर चलने वाले लोगों के लिए घंटों का जाम महज ट्रैफिक समस्या नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक परेशानीबन गया है। दूध, खाद्य सामग्री और कच्चा सामान लेकर जाने वाले वाहन भी जाम में फंसकर प्रभावित हो रहे हैं।

पुलिस से प्राप्त सूचना के मुताबिक आज रविवार को कैंची धाम में 20 हजार से ज्यादा श्रद्धालु बाबा नीम करौली के दर्शन कर चुके हैं, लेकिन वहीं दूसरी तरफ पहाड़ी मार्गों पर बढ़ता वाहनों का दबाव सवाल खड़े कर रहा है कि क्या पहाड़ों की सड़कें इतने बड़े अनियंत्रित पर्यटन का बोझ उठाने के लिए तैयार हैं ?

एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने इसे नैनीताल पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण समय बताया है। बड़ी संख्या में वाहनों के पहाड़ों पर पहुंचने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इनकी सुरक्षित और व्यवस्थित वापसी की है। इसी को देखते हुए नैनीताल पुलिस ने एग्जिट प्लान तैयार किया है और चरणबद्ध तरीके से वन-वे व्यवस्था लागू की जा रही है।

रविवार यानी आज शाम 4 बजे से रात 10 बजे तक 6 घंटे हल्द्वानी-काठगोदाम से नैनीताल, भीमताल और भवाली की ओर जाने वाला यातायात छह घंटे के लिए रोका जाएगा। इस दौरान पहाड़ों से नीचे आने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि ऊपर फंसे वाहनों को सुरक्षित तरीके से मैदान की ओर उतारा जा सके।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इस अवधि में अनावश्यक रूप से पहाड़ की ओर यात्रा न करें और अपनी यात्रा पहले से प्लान करें।

शटल सेवा बनी सहारा, मंदिर तक निजी वाहनों पर रोक

कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं से मंदिर तक निजी वाहन ले जाने से बचने की अपील की गई है। भीमताल विकास भवन, भवाली चौराहा और सैनिटोरियम से शटल बसों एवं टैक्सियों का संचालन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं से निर्धारित पार्किंग में वाहन खड़ा कर शटल सेवा से कैंची धाम जाने को कहा गया है।

कैंची धाम में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वन-वे दर्शन व्यवस्था लागू की गई है और प्रवेश-निकास के अलग-अलग रास्ते बनाए गए हैं।

स्थानीय लोगों का सवाल_आस्था जरूरी, लेकिन रास्ते भी तो चाहिए

श्रद्धालुओं की आस्था अपनी जगह है, लेकिन पहाड़ के उन लोगों की परेशानी भी नजरअंदाज नहीं की जा सकती, जिनके लिए यही सड़क रोजमर्रा की जिंदगी की लाइफलाइन है। अस्पताल जाने वाले मरीज, स्कूल-कॉलेज जाने वाले बच्चे, नौकरी पर जाने वाले कर्मचारी और जरूरी सामान लेकर चलने वाले वाहन घंटों जाम में फंस रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर कैंची धाम के लिए अलग और स्थायी यातायात समाधान की मांग भी उठ रही है। सवाल यह भी है कि कैंची धाम बाईपास को लेकर लंबे समय से किए जा रहे दावों पर जमीन पर काम कब दिखाई देगा ?

यदि श्रद्धालुओं की संख्या इसी तरह बढ़ती रही तो अस्थायी डायवर्जन और पुलिस व्यवस्था कब तक समाधान दे पाएगी ?

यह समस्या सिर्फ एक वीकेंड के ट्रैफिक की नहीं है। यह पहाड़ में बढ़ते पर्यटन दबाव, सीमित सड़क क्षमता और कमजोर ट्रैफिक प्लानिंग का संकेत भी है। आस्था को रोकना समाधान नहीं, लेकिन आस्था के नाम पर पहाड़ की लाइफलाइन को जाम कर देना भी स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकती।

पुलिस का मोर्चा संभालने का दावा, लेकिन असली समाधान स्थायी प्लानिंग

एसपी क्राइम/ट्रैफिक डॉ. जगदीश चंद्र कैंची धाम और भवाली क्षेत्र में खुद यातायात व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ और अन्य विभागों की टीमें प्रमुख स्थानों पर तैनात हैं।

फिलहाल पुलिस एग्जिट प्लान, शटल सेवा और डायवर्जन के जरिए हालात संभालने में जुटी है। लेकिन सवाल बड़ा है_ जब हर लंबे वीकेंड पर यही हालात पैदा होने लगें तो क्या हर बार सड़कों को बंद करना ही समाधान होगा ?

पहाड़ को पर्यटन चाहिए, रोजगार चाहिए और विकास चाहिए_ लेकिन ऐसा विकास नहीं, जिसमें स्थानीय नागरिक अपनी ही सड़क पर चलने के लिए घंटों इंतजार करने को मजबूर हो जाएं। अब जरूरत तत्काल ट्रैफिक प्लान से आगे बढ़कर कैंची धाम के लिए स्थायी, वैज्ञानिक और भविष्य को ध्यान में रखकर यातायात व्यवस्था तैयार करने की है।

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