धड़ल्ले से चल रहा अवैध खनन, चुप्पी पर उठ रहे सवाल..

ADVERTISEMENTS Ad Ad
ख़बर शेयर करें

​रूद्रपुर/कालाढूंगी- तराई केन्द्रीय वन प्रभाग रूद्रपुर डिवीजन में अवैध खनन का कारोबार इन दिनों चरम पर है। सत्ता के संरक्षण की आड़ में सक्रिय खनन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब उनका दायरा नदियों से होते हुए सीधे घने जंगलों तक पहुंच गया है। ताज़ा मामला बरहैनी रेंज के अंतर्गत आने वाली बोरनदी का है, जहां नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है।


​ ​ सूत्रों के अनुसार जिस स्थान पर अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है उसके बेहद करीब ही पीपल पडा़व रेंज भी स्थित है। हैरानी की बात यह है कि बहरैनी और पीपल पड़ाव दोनों ही रेंजों के जिम्मेदार अधिकारी इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह आंखें मूंदे बैठे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वन विभाग और पुलिस प्रशासन की कथित मिलीभगत के बिना इस तरह का गंभीर खेल संभव नहीं है।


सूत्रों के अनुसार तराई केन्द्रीय वन प्रभाग रूद्रपुर डिवीजन की बरहैनी रेंज की नदियों में पिछले कई दिनों से अवैध खनन का यह सिलसिला बेरोकटोक जारी है। खनन माफिया दिन तो दिन रात सन्नाटे में जंगल के बीचों-बीच पहुंचकर जेसीबी और अन्य माध्यमों से नदी खोद रहे हैं और बेशकीमती उपखनिज निकालकर धड़ल्ले से बेच रहे हैं। स्थानीय ग्रामीण इलाकों से ताल्लुक रखने वाले ये माफिया राजनीतिक संरक्षण की आड़ में बेखौफ होकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।


वही ​बरहैनी रेज के आरक्षित वन क्षेत्र जंगल और नदियां पूरी तरह से खनन माफियाओं के शिकंजे में जकड़ चुकी हैं। स्थिति यह है कि इन पर अंकुश लगाने में पुलिस, प्रशासन और वन विभाग पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं। जिस प्रकार से नदियों को खोखला किया जा रहा है, उससे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।


​यदि समय रहते इस अवैध खनन पर रोक नहीं लगाई गई, तो यह न केवल पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए बड़ा खतरा बनेगा, बल्कि क्षेत्र में किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा को भी न्योता दे सकता है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कड़ा कदम उठाते हैं।

रिपोर्ट – मुकेश कुमार (लालकुआं)

Ad Ad Ad Ad Ad
लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -

👉 Join our WhatsApp Group

👉 Subscribe our YouTube Channel

👉 Like our Facebook Page

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *