“सत्ता, बंदूक और संरक्षण : निर्दोष नितिन की मौत के बाद अब आगे क्या_गैंगवार..?

निर्दोष नितिन को मारने वाला चिंटू भाजपा से आउट
हल्द्वानी में सत्ता के नशे में चूर भाजपा के बेलगाम पार्षद द्वारा की गई फायरिंग ने शहर को झकझोर कर रख दिया है। वार्ड नंबर-55 के भाजपा पार्षद अमित बिष्ट उर्फ़ चिंटू ने 22 वर्षीय नितिन लोहानी की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने अब आरोपी पार्षद को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला
घटना रविवार देर रात करीब साढ़े 11 बजे की है। मृतक नितिन लोहानी, जो दिल्ली में पढ़ाई करता था, 28 दिसंबर को छुट्टियों में हल्द्वानी आया था। वह अपने दोस्त कमल भंडारी के साथ स्कूटी से घर लौट रहा था। रास्ते में एसकेएम स्कूल के पास नहर रोड पर नितिन ने अपने दोस्त जय बिष्ट (आरोपी पार्षद का बेटा) से मिलने की बात कही।
जैसे ही स्कूटी घर के पास रुकी और डोरबेल बजाई गई, आरोप है कि अमित बिष्ट बालकनी में 12 बोर की लाइसेंसी बंदूक लेकर आ गया, गाली-गलौज शुरू की और विरोध करने पर फायरिंग कर दी। गोली लगते ही नितिन गिर पड़ा। भागने की कोशिश में पीछे से फिर गोली मारी गई। गंभीर हालत में नितिन को सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
हत्या का मुकदमा
मृतक के बड़े भाई पीयूष लोहानी की तहरीर पर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर आरोपी पार्षद को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने डंपर (correction: gun seized) लाइसेंसी बंदूक भी कब्जे में ले ली है।
पुराने विवाद और दबंगई का इतिहास
सूत्रों के अनुसार, आरोपी पार्षद का बेटा और नितिन दोस्त थे, लेकिन बीते दिनों से किसी विवाद को लेकर तनाव चल रहा था। आरोप है कि राजनीतिक रसूख के चलते पार्षद पहले भी कई विवादों में रहा, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
बताया जा रहा है कि बीते 6 सितंबर 2025 को एक झगड़े में जब पुलिस आरोपी पार्षद को थाने लाई थी, तब पूर्व मंत्री बंशीधर भगत उसकी पैरवी करने थाने पहुंच गए थे, धरना दिया मीडिया के सामने एसएसपी को हड़काया और अंततः पार्षद को छोड़ना पड़ा। उस घटनाक्रम ने तब भी पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे।
अब भाजपा ने किया निष्कासन
घटना के बाद बढ़ते दबाव के बीच भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप सिंह बिष्ट ने आरोपी पार्षद अमित बिष्ट को पार्टी से निष्कासित कर दिया।
वहीं पूर्व मंत्री बंशीधर भगत ने बयान दिया है..
“मैंने न किसी अपराधी को संरक्षण दिया है, न दूंगा। अपराधी कोई भी हो, जेल जाएगा।”
जनता के सवाल अब भी कायम
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सत्ता, हथियार और संरक्षण के घातक गठजोड़ का उदाहरण है। सवाल यह है कि—
क्या यह कार्रवाई स्थायी होगी या अस्थायी दिखावा ?
आरोपी रसूख के दम पर कुछ दिन बाद जमानत पर बाहर आ जाएगा ?
और क्या प्रशासन भविष्य में ऐसे बेलगाम सत्ता-समर्थित अपराधियों पर समय रहते कार्रवाई करेगा ?
एक निर्दोष युवक की जान जा चुकी है।

क्या हल्द्वानी गैंगवार की दहलीज़ पर ..?
हल्द्वानी आज सिर्फ एक शहर नहीं, राजनीतिक संरक्षण में पलते अपराध का प्रयोगशाला बनता जा रहा है। पंचायत चुनावों से लेकर खुलेआम दबंगई, मारपीट, अपहरण और हत्या तक,अपराध अब घटना नहीं, एक पैटर्न बन चुका है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन अपराधों के पीछे खड़े गैंग नहीं, उनके आका हैं। जिनकी नज़र में ‘नंबर’ बढ़ाने की होड़ में अपराधियों को खुली छूट मिलती दिख रही है।
गैंगों का जाल
हल्द्वानी में बीते कुछ समय से कई गैंग सक्रिय हैं जैसे ITI गैंग, दरमवाल गैंग, चिंटू गैंग समेत अन्य नाम। दिखावे में ये अलग-अलग हैं, पर इनकी धुरी वही नेता हैं जो ज़रूरत पड़ने पर इनका इस्तेमाल शक्ति प्रदर्शन में और अपनी ताकत दिखाने या डराने (भौकाल) में करते हैं। समय पर इन्हें खुलकर समर्थन भी देते हैं।
ये राजनीतिक संरक्षण प्राप्त अपराधी- बड़े कांड यानी अपराध के बाद सोशल मीडिया पर जश्न भी मनाते हैं। जिसपर दिखती है पुलिस की संकोच भरी चुप्पी। अब सिस्टम झुकता है, तो जनता क्या बोले?
बीते रोज गोलीकांड से इन बातों का क्या मतलब, वो जानना जरूरी है, निर्दोष नितिन लोहनी की जान चली गई। आरोपी चिंटू बिष्ट और दरमवाल गैंग के बीच अदावत पुरानी बताई जा रही है। दोनों के होटल आमने-सामने, नज़दीकियां और दूरी- सब राजनीतिक छत्रछाया में पनपी। बताया जा रहा है।
घटना के वक्त कहा गया “तू दरमवाल गैंग से है” और गोली चला दी गई। सवाल उठता है,क्या यह व्यक्तिगत अपराध था, या गैंग-मानसिकता का परिणाम ?
देवलचौड़ की तस्वीर, आज की सच्चाई
यही चिंटू बिष्ट देवलचौड़ चौराहे पर दौड़ा-दौड़ा कर पिटाई के मामले में गिरफ्तार हुआ था। वीडियो वायरल हुआ, पुलिस ने कार्रवाई की,लेकिन राजनीतिक हस्तक्षेप ने तस्वीर बदल दी।
विधायक ने समर्थकों के साथ कोतवाली के बाहर धरना दिया। एसएसपी को सार्वजनिक फटकारा तुम्हें पर लगाकर उड़ कर आना चाहिए था कप्तान बोले मैं दौड़कर आया और आखिरकार चिंटू की रिहाई। उस दिन संदेश साफ था,कानून से ऊपर संरक्षण है।
आज उसी संरक्षण की छाया में एक निर्दोष की हत्या हुई।
फिलहाल पुलिस ने चिंटू बिष्ट को गिरफ्तार किया है। पर असली परीक्षा अब शुरू होती है
क्या यह गिरफ्तारी कानूनी प्रक्रिया के अंत तक टिकेगी या जमानत फिर से रसूख की सीढ़ी बनेगी ?
और सबसे अहम – क्या हल्द्वानी गैंगवार की ओर बढ़ रहा है ?
शहर के लिए चेतावनी
जब अपराधी आका की नज़र में नंबर बढ़ाने के लिए कांड करते हैं, तब हिंसा बढ़ती है। और राजनीतिक संरक्षण ढाल बनता है।
नितिन की मौत एक चेतावनी है। कि यदि आज संरक्षण पर लगाम नहीं लगी, तो कल शहर को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। सवाल किसी एक नाम का नहीं, सिस्टम की साख का है।
अब देखना यह है कि हल्द्वानी में कानून चलेगा या आका का राज ?


लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
GKM News is a reliable digital medium of latest news updates of Uttarakhand. Contact us to broadcast your thoughts or a news from your area. Email: newsgkm@gmail.com




उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी पर लगाई रोक
“सत्ता, बंदूक और संरक्षण : निर्दोष नितिन की मौत के बाद अब आगे क्या_गैंगवार..?
महिला को मार, दहशत फैलाने वाला हमलावर_ पिंजरे में कैद..Nainital
हल्द्वानी में दर्दनाक हादसा, 13 साल के मासूम की जान चली गई..
सुशासन ऑन ग्राउंड, ओखलकांडा में प्रशासन जनता के द्वार..