नैनीताल होटल एसोसिएशन ने कहा “सरकार बुलाती है, पुलिस भगाती है!” दोहरी नीति क्यों..?

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उत्तराखण्ड में नैनीताल के पर्यटन से जुड़ी होटल एसोसिएशन गिरते पर्यटन संबंधी अपने दर्द लेकर मीडिया के सामने पहुंची। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि पुलिसिंग के कारण इस वर्ष का एक फेस्टिवल ठप हो गया है और आने वाले समय में पर्यटन को भारी नुकसान होने की आशंका है।


नैनीताल के बोट हाउस क्लब में मीडिया से बात करते हुए होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय बिष्ट ने कहा कि पूरे ऊत्तराखण्ड के पहाड़ों में पुलिस की व्यवस्था खराब है, सरकार एक तरफ पर्यटकों को पहाड़ में बुला रही है और दूसरी तरफ पुलिस का व्यवहार और ट्रैफिक प्लान पर्यटक विरोधी होता है। वो प्लान पर्यटकों को भगाने के लिए होता है।

इस वर्ष नैनीताल मसूरी व अन्य पर्यटक स्थल खाली पड़े थे। पुलिस के माध्यम से दिखाया गया कि होटल भरे हैं और जाम लगा है। सरकार ने इस कदम का संज्ञान लेना चाहिए, पुलिस हमसे बैठक करती है तो वो हमारे सजेशन नहीं लेती बल्कि हमारे सर अपना प्लान थोपती है। स्टेक होल्डरों के सजेशन नहीं लिए जाते हैं और गलत प्लान लागू किया जाता है।

सरकार को राजस्व की हानि हो रही है। पचास प्रतिशत राजस्व पर्यटन से मिलता है। गलत होटल या अपंजीकृत प्रॉपर्टी सबसे बड़ा खतरा है। इससे राजस्व और सुरक्षा दोनों को खतरा है। होम स्टे खुलना अच्छा है लेकिन इसे बाहर के लोग चला रहे हैं और ये यहीं के लोगों को मिलना चाहिए। सी.एम.ने स्टेक होल्डरों के साथ बैठक करनी चाहिए।

फेक रील से बड़ा नुकसान होता है इसमें नीति और कानून बनाना चाहिए। प्रदेश में सड़क के हाल भी बुरे हैं, सड़क में गड्ढे ही गड्ढे हैं और पर्यटक तभी आएंगे जब सड़कें ठीक होंगी। 1976 में बना एयरपोर्ट ठीक से काम नहीं करता है और फ्लाइट कैंसिल हो जाती है। सात साल बाद मॉल रोड का काम शुरू हुआ है, अगर इस बीच वो गिर जाती तो क्या होता ?


चार धाम समेत अन्य जगहों में ऑनलाइन फ्रॉड चल रहा है जिसे रोकना जरूरी है। पार्किंग और चुंगी के रेट भी ज्यादा होने से पर्यटन पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। उसके रेट कम होने चाहिए। पुलिस के कारण 50% की बुकिंग थी और सरकार अपनी पीठ थपथपा रही है। सी.एम.ने सभी को बुलाकर इसपर चर्चा करनी चाहिए। नैनीताल में तो तभी भी थोड़ा बहुत काम है, लेकिन पहाड़ों में मुश्किलें बढ़ गई हैं।

लोग लोन जमा नहीं कर पा रहे हैं। अगर पर्यटन पटरी पर नहीं आता तो लोग सड़कों पर आ जाएंगे। मसूरी में भी ट्राफिक प्लान के कारण बुरी स्थिति है। पर्यटन हमारी रीड की हड्डी है, हम इसको लेकर सी.एम.से मिलेंगे। इनके ट्रैफिक प्लान के चलते हमारे रिश्तेदार तक नैनीताल या पहाड़ नहीं पहुंच पा रहे हैं।

ऑफिसर सुनने को तैयार नहीं है, हम विरोध करते हैं लेकिन ये बात बाहर नहीं आ पाती है। पुलिस अपना प्लान बना लेती है और प्रेस के माध्यम से प्रचार प्रसार कर लेती है, जबकी दूसरी तरफ खानापूर्ति के लिए पर्यटन से जुड़े लोगों की बैठक लेते हैं।


चुंगी और पार्किंग के रेट पालिका बोर्ड से पास हुए थे, हमने एक पत्र के माध्यम से इन्हें कम करने के लिए कहा है। इस वर्ष कार्निवाल बहुत कम समय के अंदर कराया गया, इसलिये पर्यटक बड़ी संख्या में नहीं पहुँच सके। इसका फायदा आने वाले समय में हमें मिलेगा। विंटर कार्निवाल को कैलेंडर में लाया जाए।

नैनीताल में 400 होटल और होम स्टे पंजीकृत हैं, जबकि इतने ही अपंजीकृत हैं। यहां, अवैध कारोबार की एक गैंग चल रही है। पुलिस इनपर लगाम क्यों नहीं लगा रही है ? जितनी पार्किंग खाली है उतने लोगों को तो आने दें। ये पर्यटकों को पहाड़ आने से हतोत्साहित करना है।


इस दौरान, एसोसिएशन के महासचिव वेद साह, उपाध्यक्ष आलोक साह, कोषाध्यक्ष सी.पी.भट्ट, उप सचिव स्नेह छाबड़ा, पी.आर.ओ.रुचिर साह, आलोक साह, रमनजीत सिंह, जतिन जेठी आदि मौजूद रहे।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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