संतुष्ट नहीं हुए तो मुख्य सचिव होंगे पेश_ज्योलिकोट जल संकट पर हाईकोर्ट सख्त

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उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ज्यूलिकोट में दूषित पेयजल से तीन मौत संबंधी जनहित याचिका में संबंधित अधिकारियों द्वारा जलस्रोतों के संबंध में कोई स्पष्ट जवाब न दे पाने पर कड़ी नाराजगी जताई और महाधिवक्ता(ए.जी.)से स्पष्टीकरण मांगा। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने मुख्य सचिव से प्रकरण की निगरानी कर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

न्यायालय ने ये भी साफ किया कि जवाब से असंतुष्ठ होने पर मुख्य सचिव को हाजिर होना होगा।
नैनीताल के ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैली बीमारी के मामले में आज सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की कोर्ट में जिलाधिकारी, सी.एम.ओ., जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए।

न्यायालय ने प्रशासन को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई तक दूषित पानी के स्रोतों का पता लगाकर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें।


​ सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य होने और जल स्रोतों के सैंपल ठीक होने का दावा किया गया, लेकिन राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्टों ने इन दावों की पोल खोल दी।

तल्ला मल्ला छिंडां, वीरभट्टी, बेलुआखान और सरिताताल समेत 10 स्थानों से लिए गए पेयजल सैंपल इंडियन ड्रिंकिंग वाटर लैब में फेल पाए गए और पानी में घातक बैक्टीरिया मिले। खुर्पाताल क्षेत्र के निवासियों ने सरिताताल के पास सीवर लाइन चोक होने से पेयजल स्रोतों में गंदगी मिलने और बीमारी फैलने की आशंका के संबंध में प्रार्थनापत्र दाखिल किया, जिसे कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया।


​अदालत ने अधिकारियों को ग्रामीण स्वास्थ्य के प्रति संवेदनहीनता और ग्रामीणों द्वारा एक माह पूर्व की गई बदबूदार पानी की शिकायत पर समय से संज्ञान न लेने पर जमकर फटकार लगाई। याचिकाकर्ता अधिवक्ता रवि बिष्ट की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि टैंकरों के माध्यम से सप्लाई किए जा रहे पानी में अत्यधिक क्लोरीन मिलाया जा रहा है।

जिससे प्रभावित लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की सीधी निगरानी करने और व्यक्तिगत हलफनामा प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।


​न्यायालय ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को प्रभावित क्षेत्रों से तत्काल फ्रेश सैंपल लेने और पूरे नैनीताल क्षेत्र में पेयजल टैस्टिंग कराने के कड़े निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने सी.एम.ओ.को प्रभावित परिवारों की स्थिति पर अलग से शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।

न्यायालय ने ये भी कहा कि अगली सुनवाई तक सरकार अगर बीमारी फैलने के मुख्य कारणों पर ठोस जवाब नहीं देती, तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में पेश होने के आदेश दिए जाएंगे।

वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती

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