
उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय की तीन न्यायधीषों वाली पीठ ने एक लैंडमार्क निर्णय देते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बावजूद उसे अग्रिम जमानत(एंटीसिपेटरी बेल)दी जा सकती है। दो न्यायधीषों ने इसके पक्ष और एक ने विपक्ष में अपनी राय दी थी, जिसके बाद ये मान्य हो गई।
उच्च न्यायालय में कुछ समय से ये बहस चल रही थी कि किसी भी मामले में अगर आरोपी के खिलाफ जांच के बाद आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो जाती है तो क्या उसे एंटीसिपेटरी बेल दी जा सकती है या नहीं ? कई पक्ष सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने इस मामले में निर्णय को सुरक्षित कर लिया था।
आज मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी, वरिष्ठ न्यायमूर्ति मंनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी की पीठ ने अपना निर्णय सुनाया। इसमें मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और वरिष्ठ न्यायमूर्ति मंनोज तिवारी की तरफ से कहा गया कि ऐसी परिस्थिति में आरोपी को एंटीसिपेटरी बेल दी जा सकती है।
जबकि न्यायमूर्ति रविन्द्र मैठाणी का मत था कि बेल नहीं दी जानी चाहिए। ऐसे में मेजोरिटी(बहुमत)के आधार पर न्यायालय ने चार्जशीट के बावजूद एंटीसिपेटरी बेल की अपील को स्वीकार करने की अनुमाती दे दी है।
वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती


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