एक और जान गई, सवाल वही_कब जागेगा सिस्टम ?

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उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों का खतरा लगातार गहराता जा रहा है। ताजा मामला सूर्या गांव का है, जहां बाघ के हमले में हंसी देवी पत्नी लाल सिंह की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को दहला दिया है और ग्रामीणों में भय का माहौल है।

इस दुखद घटना के बाद प्रदेश प्रवक्ता नीरज तिवारी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने शोक संतप्त परिजनों को ढांढस बंधाया और दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

जनहित को प्राथमिकता देते हुए संबंधित अधिकारियों, विशेषकर DFO से वार्ता कर कई अहम मांगें रखी गईं_आदमखोर वन्यजीव को तुरंत पकड़ने या आवश्यक कार्रवाई करने की मांग।

गांव में सुरक्षा के लिए नियमित गश्त बढ़ाने की जरूरत,,पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था,,गांव में सौर ऊर्जा लाइट लगाने की मांग,,सोलर फेंसिंग के जरिए गांव की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

कालाढूंगी में भी दर्दनाक हादसा, हाथी के हमले में गई एक और जान

इसी कड़ी में कालाढूंगी क्षेत्र से भी दुखद खबर सामने आई, जहां हाथी के हमले में भूपेंद्र सिंह की मौत हो गई। प्रदेश प्रवक्ता ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और रामनगर के वन अधिकारियों से बातचीत कर तत्काल मुआवजा देने, क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के साथ परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान करने की मांग रखी।

नीरज तिवारी ने साफ कहा कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से त्वरित और ठोस कदम उठाने की अपेक्षा जताई, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

लगातार हो रहे वन्यजीव हमले यह संकेत दे रहे हैं कि मानव और वन्यजीव संघर्ष अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में केवल संवेदनाएं नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। ताकि किसी और परिवार को इस दर्द से न गुजरना पड़े।

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