जेल में मोबाइल चला रहा था कैदी , कारागार और पुलिस प्रशासन में मचा हड़कंप..

हरिद्वार (GKM न्यूज़ रिज़वान अहमद) जिला हरिद्वार कारागार में कैदियों के ठाठ का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि हरिद्वार जेल में मोबाइल मिलने का सिलसिला लगातार जारी है जेल प्रशासन द्वारा की गई चेकिंग के दौरान जब बैरिक नंबर 4 में मोबाइल बरामद हुआ तो जेल प्रशासन में हड़कंप मच गया जेल से मोबाइल मिलने के मामले में जेल अधीक्षक अशोक कुमार द्वारा सिडकुल थाने में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है वही उच्च अधिकारियों को भी इस मामले की सूचना दी गई है.
अब सिडकुल थाना पुलिस द्वारा मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है हरिद्वार स्थित जिला जेल में मोबाइल मिलने का यह कोई पहला मामला नहीं है जेल में इससे पहले भी कई बार कैदियों के पास से मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं जेल प्रशासन की कारगुजारी का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि जेल के अंदर भी कैदियों को मोबाइल फोन बड़े आराम से उपलब्ध हो जाती है और इसका यह कैदी जिस तरह चाहे उस तरह इस्तेमाल कर सकते हैं जेल प्रशासन कैदियों के पास मोबाइल पहुंचने से रोकने में नाकाम साबित हो रहा है कुछ दिन पूर्व ही हरिद्वार जेल से एक व्यापारी से फोन कर फिरौती मांगी गई थी.
जिसके बाद जेल प्रशासन द्वारा जेल में सर्च किए जाने पर हरिद्वार जेल से 5 मोबाइल बरामद किए गए थे और मामले में मुकदमा दर्ज कराया गया था अब एक बार फिर हरिद्वार जेल से मोबाइल बरामद होने से जेल प्रशासन पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं इस मामले में सीओ सदर आयुष अग्रवाल का कहना है कि हरिद्वार जेल अधीक्षक द्वारा सिडकुल थाने पर तहरीर देकर सूचना दी गई थी कि जांच के दौरान जेल के भीतर एक मोबाइल फोन बरामद किया गया है इस मामले में तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच की जा रही है सर्च के दौरान यह मोबाइल जेल में मिला है.
मोबाइल फोन किसी कैदी के पास ना मिलने के कारण इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है लगातार जेल में पकड़े जा रहे मोबाइल फोन पर सीओ सदर का कहना है कि पूर्व में भी जेल प्रशासन द्वारा सर्च के दौरान 5 मोबाइल बरामद किए थे इस मामले में भी मुकदमा दर्ज हुआ है इन दोनों मामलों में जांच की जा रही है जो भी तथ्य प्रकाश में आएंगे उनके हिसाब से आगे की कार्रवाई की जाएगी.
बयान–आयुष अग्रवाल–सीओ सदर हरिद्वार
जेल प्रशासन की नाक के नीचे कैदियों को बड़े आराम से मोबाइल फोन उपलब्ध हो जाता है और इस फोन को यह कैदी लोगों को धमकाने लोगों से फिरौती मांगने और जेल के भीतर बैठकर ही किसी की भी हत्या कि सुपारी देने जैसे संगीन अपराधों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल करते हैं इस तरह हरिद्वार जेल में बंद कैदियों के पास बड़ी आसानी से मोबाइल पहुंचना जेल प्रशासन की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े करता है अब देखने वाली बात यह होगी कि मुकदमा दर्ज करने के बाद सिडकुल थाना पुलिस द्वारा जांच में पाए जाने वाले तथ्यों के आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाती है.


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