Watch छीछालेदर – हल्द्वानी में ब्लॉगर आउट ऑफ़ कंट्रोल_गालियां कान सुन्न कर देंगी

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हल्द्वानी – शहर की शान नैनीताल रोड स्थित चौपाटी में दो ब्लॉगरों के बीच हुए विवाद ने सड़क पर तमाशे का रूप ले लिया। जिसका video सोशल मीडिया पर धमाकेदार तरीके से वायरल हो रहा है। ब्लॉगर ज्योति अधिकारी और सुनीता भट्ट के बीच कहासुनी बढ़ते-बढ़ते खुलेआम गाली-गलौज और झड़प में बदल गई, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप के दौरान दोनों ब्लॉगर ने बेशर्मी की सारी हदें पार करते हुए जमकर गालियों अपशब्दों की बौछार करी वो भी पब्लिक प्लेस में। छीछालेदर ऐसी की मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी भी सन्न रह गए।

काठगोदाम पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर थाने ले आई। पुलिस ने दोनों के खिलाफ शांति भंग की धाराओं में कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस के अनुसार दोनों ब्लॉगरों की आज की रात काठगोदाम थाने में ही कटेगी, जबकि आगे की कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।

इस मामले में एसएसपी मंजूनाथ टीसी ने साफ संदेश दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर अराजकता और हंगामा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

डिजिटल तमाशा’ बनता समाज – क्या पारिवारिक विवाद अब सोशल मीडिया की नई सीढ़ी ?

यहां बताते चलें सोशल मीडिया पर हाल के दिनों में दीक्षा पडलिया और उनके ससुराल से जुड़ा विवाद तेजी से वायरल हुआ। यह मामला केवल एक पारिवारिक कलह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज की उस बदलती मानसिकता को उजागर कर दिया है, जहाँ निजी विवाद भी डिजिटल मंच पर ‘कंटेंट’ बनते जा रहे हैं।

हैरानी की बात यह है कि विवाद सामने आते ही दीक्षा के फेसबुक फॉलोअर्स लगभग 7 हजार से बढ़कर 35 हजार से अधिक हो गए। यह सवाल खड़ा करता है कि क्या आज के दौर में लोकप्रियता और फॉलोअर्स पाने के लिए निजी जिंदगी को सार्वजनिक करना एक आसान रास्ता बनता जा रहा है?

सोशल मीडिया का बदलता इस्तेमाल
आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दो तरह की प्रवृत्तियां साफ दिखाई देती हैं।

समाज से जुड़े मुद्दे उठाने वाले लोग, जो पलायन, रोजगार, सरकारी व्यवस्थाओं और सामाजिक समस्याओं पर आवाज उठाते हैं, लेकिन उन्हें अपेक्षित समर्थन नहीं मिलता।

घरेलू ब्लॉगिंग और विवाद, जहां निजी जीवन के झगड़े और पारिवारिक घटनाएं तेजी से वायरल होती हैं और बड़ी संख्या में दर्शक जुटाते हैं।

सवाल समाज से भी
यह केवल कंटेंट बनाने वालों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि दर्शकों की पसंद भी इस प्रवृत्ति को बढ़ावा देती है। दूसरे के निजी जीवन में झांकने की जिज्ञासा आज डिजिटल बाजार का हिस्सा बन चुकी है।

अगर समाज गंभीर मुद्दों से अधिक विवादों को ही तवज्जो देगा, तो सोशल मीडिया पर समाधान से ज्यादा ‘तमाशे’ ही दिखाई देंगे। ऐसे में यह जरूरी है कि दर्शक और समाज दोनों मिलकर तय करें कि डिजिटल दुनिया में किस तरह के कंटेंट को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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