अमेरिकी हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर ख़ामेनई की मौत, दुनिया में हलचल..


अमेरिका और इसराइल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की मौत हो गई है।
शनिवार को अमेरिका और इसराइल ने ईरान के कई शहरों पर हमले किए थे और रविवार तड़के अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ख़ामेनेई की मौत को लेकर दावा किया था।
इसके बाद ईरान के सरकारी मीडिया ने ख़ामेनेई की मौत की पुष्टि की थी।
ईरान के सरकारी टीवी के प्रेज़ेंटर ने रोते हुए ख़ामेनेई की मौत की घोषणा की और बताया देश में 40 दिनों का शोक रहेगा.
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, “इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक ख़ामेनेई अब मर चुके हैं.”
वहीं अमेरिका में बीबीसी के न्यूज़ पार्टनर सीबीएस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि हमलों में तक़रीबन 40 ईरानी अधिकारी मारे गए हैं।
इसराइल ने कहा है कि उसने कई वरिष्ठ अफ़सरों को मार दिया है, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रमुख भी शामिल हैं।
दूसरी ओर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) का एक बयान सामने आया है जिसमें उसने चेतावनी दी है कि वो अमेरिकी अड्डों और इसराइल पर हमला करेगा।
इस बयान में कहा गया है, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान की आर्म्ड फ़ोर्स के इतिहास का सबसे ख़तरनाक हमला कुछ ही पलों में कब्ज़े वाले इलाक़ों और अमेरिकी आतंकवादी अड्डों की ओर शुरू होगा।
इस पर ट्रंप ने जवाब देते हुए कहा है कि अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका पलटवार करेगा।
वहीं सरकारी टीवी चैनलों पर प्रेज़ेंटर्स के पढ़े गए बयानों से ये पता चला है कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बताया है कि आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई की शनिवार तड़के उनके दफ़्तर में मौत हुई, जब वह “अपने कामकाज में व्यस्त थे।
वहीं सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए यह भी पुष्टि की है कि तेहरान में ख़ामेनेई के दफ़्तर लीडरशिप हाउस कंपाउंड के कई हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुँचा है।
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) से जुड़ी तसनीम न्यूज़ एजेंसी ने कहा है कि ख़ामेनेई की अपने दफ़्तर में हुई मौत इस बात का सबूत है कि उनके कहीं छिप जाने की ख़बरें “दुश्मनों का मनोवैज्ञानिक युद्ध” थीं।
ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत के बाद देश और दुनिया में हलचल
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है. अयातुल्ला की मौत के बाद दुनिया के कई हिस्सों में शोक और मातम का माहौल है. ईरान से लेकर भारत के जम्मू-कश्मीर तक लोग मातम मना रहे हैं. अयातुल्ला खामेनेई का पूरी दुनिया के शिया मुसलमानों के बीच एक बड़ा स्थान था. धार्मिक तौर पर शिया समुदाय उन्हें काफी फॉलो करता है. यही वजह है कि शियाओं में शोक का माहौल है।
अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सेना, वहां की पॉलिटिकल लीडरशिप और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बदला लेने की बात कही है. इससे मिडिल-ईस्ट में और बड़े संघर्ष की संभावना बढ़ गई है।
ईरान के शहरों में पसरा मातम
ईरान के अलग-अलग शहरों में गम का माहौल है. राजधानी तेहरान से लेकर इस्फहान, कुम, मशहद, जनजान जैसे शहरों में खामेनेई समर्थक सड़कों पर उतर गए हैं. अमेरिका और इजरायल के खिलाफ जमकर नारेबाजी हो रही है. केवल ईरान ही नहीं, पड़ोसी देश इराक और भारत में भी बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं।
इराक में मातम का माहौल
इराक में इस्लाम धर्म की बड़ी शख्सियतों में से एक हजरत इमाम हुसैन की दरगाह है. हजरत इमाम हुसैन का शिया समुदाय में बहुत ऊंचा दर्जा है. अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद लोग हजरत इमाम की दरगाह पर जुटने लगे हैं. लोग वहां आकर मातम मना रहे हैं।
दरगाह पर आए सभी लोग भावुक हैं. क्योंकि अयातुल्ला खामेनेई न सिर्फ एक राजनीतिक बल्कि एक धार्मिक लीडर भी थे. शिया कम्युनिटी में उन्हें एक तरह से ‘गार्जियन’ का दर्जा दिया जाता था।
इसके साथ ही लेबनान, जो एक शिया बहुल देश है, वहां भी अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद शोक का माहौल है।
लेबनान स्थित हथियारबंद ग्रुप हिजबुल्लाह भी उन्हें अपना रहनुमा मानता था. संभव है कि हिजबुल्लाह भी अब सीधे तौर पर इजरायल के ऊपर राकेट्स से हमला कर सकता है।
भारत में शोक
अयातुल्ला खामेनेई के समर्थक भारत में भी बड़ी संख्या में हैं. यहां दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास में लगे झंडे को झुका दिया गया है।
साथ ही जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में लोग बड़ी संख्या में अयातुल्ला की मौत पर मातम मना रहे हैं. लोगों का कहना है कि रमजान के इस पवित्र महीने में अपने लीडर को खोना बहुत ही दर्दनाक है।


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