हल्द्वानी के मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी_ इंदिरा हृदयेश की विरासत को सुमित ने आगे बढ़ाया


उत्तराखण्ड में हल्द्वानी के विधायक सुमित अपनी दिवंगत मंत्री माँ इंदिरा हृदेश की राह चल रहे हैं। हाल में ही गैरसैण विधानसभा सत्र में दबंगई से सामाजिक मुद्दों से भरे सवालों की झड़ी लगाने के लिए चर्चाओं में आए थे। स्व.इंदिरा हृदयेश भी अपने क्षेत्र से जुड़े गंभीर मुद्दों को विधानसभा से स्वीकृत कराकर ही आती थी। क्षेत्रवासियों ने समस्याओं को उठाने के लिए सुमित का स्वागत किया।
अंग्रेजी की एक कहावत है, ‘Like mother like son’ यानी ‘जैसा माँ ने किया वैसा ही बेटा भी कर रहा है’। हल्द्वानी की स्वर्गीय दबंग मंत्री माँ इंदिरा हृदेश के पदचिन्हों पर चलते हुए विधायक बेटे सुमित ने सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को विधानसभा में उठाया। सुमित की माता ने हल्द्वानी के गौलापार में आई.एस.बी.टी.और अंतराष्ट्रीय स्टेडियम के साथ चिड़ियाघर(ज़ू)का सपना देखा था। इसमें से उन्होंने अपने रहते स्टेडियम बनाया था, जिसमें आजकल लेजेंड क्रिकेट लीग चल रही है।
नैनीताल के सैन्ट जोसफ कॉलेज से शिक्षा ग्रहण करने के बाद मिशिगन यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। तीन भाइयों में सबसे छोटे सुमित ने माँ के देहांत के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के टिकट पर हल्द्वानी से विधानसभा में एंट्री करी। सुमित ने विधानसभा में हल्द्वानी समेत कई महत्वपूर्ण सवाल उठाकर सत्ता पक्ष को असहज कर दिया।
उन्होंने, आयुष्मान कार्ड में टैस्ट और मैटरनिटी को जोड़ने, गैस की किल्लत दूर करने, देहरादून की तर्ज पर हल्द्वानी में भी फॉरेन लैंग्वेज(विदेशी भाषा)का सेंटर खोलने, नाबालिग खिलाड़ियों के राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय मैडल जीतने के बाद उन्हें बालिग होने पर नौकरी देने, नैनीताल और यू.एस.जिले में चौपट सुरक्षा व्यवस्था, पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधा चाक चौबंद करने समेत 20 से 25 सवाल उठाए।
उन्होंने, गौलापार अंतराष्ट्रीय स्टेडियम में खेल गतिविधियों में गड़बड़ी को भी उठाया। विधायक सुमित ने शनिवार को स्टेडियम में चल रहे लेजेंड क्रिकेट लीग में पहुंचकर भारी भीड़ के बीच कहा था कि “मेरी माँ का सपना यही था, जो आज पूरा हुआ है”।
इंदिरा हृदयेश उत्तर प्रदेश समेत ऊत्तराखण्ड के कई महत्वपूर्ण पदों पर रही। उन्होंने, उत्तर प्रदेश में मेंबर ऑफ लेजिस्लेटिव काउंसिल(एम.एल.सी.)रहते शिक्षकों की स्थानांतरण पॉलिसी आदि मुद्दों को सरगर्मी से उठाया। उत्तराखण्ड निर्माण के साथ ही माँ इंदिरा हृदेश ऊत्तराखण्ड विधानसभा के विपक्ष में पहुंची और इस नए प्रदेश के रोडमैप को संवारने के लिए काम किया। उन्होंने नवनिर्मित सरकार को विकास के मार्ग में चलने के लिए बाध्य किया था।
इसके बाद कुछ वर्ष सत्ता में रहने के बाद माँ नेता प्रतिपक्ष बनी और ये वही दौर था जब कोविड19 का वायरस चरम पर था। अपने सपनों को अधूरा छोड़ मैडम अचानक अंतिम यात्रा में चली गईं।
अब बेटे सुमित अपनी माँ के पदचिन्हों पर चलकर क्षेत्र की सेवा कर रहे हैं जिसके लिए आज बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उनका आभार जताने उनके आवास में पहुंचे थे।
वरिष्ठ पत्रकार कमल जगाती


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